जनजाति शोधार्थी राम कुमार ने किया शब्द सुमन में पद्म विभूषित डॉ. तीजन की श्रद्धांजलि का संकलन

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भिलाई, नगर निगम भिलाई चरोदा के गनियारी वार्ड की मूल निवासी, अटारी पाटन विकासखंड के पारधी जनजाति परिवार में जन्मी पद्म विभूषित डॉ. तीजन बाई के आकस्मिक निधन से जहां छत्तीसगढ़ सहित विश्व की पंडवानी लोक गाथा विधा की अपूर्णीय क्षति हुई है। वहीं देश के प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री, अन्य राजनेताओं ने अपने शोक संदेश देते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

वहीं समाचार पत्र समूह के संपादकों, संवाददाताओं ने उनकी गंभीर बीमारी की अवस्था से लेकर निरंतर उनकी पंडवानी गाथा विधा, उसके सांगीतिक पक्ष, कथा गायन, एकल अभिनय, तमुरे की झंकार, इसे बहुपयोग गदा, धनुष, बांसुरी, पुष्कप विमान और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के अनुरुप प्रदर्शन, संघर्षपूर्ण पारिवारिक व, सामाजिक जीवन से बहुत ऊपर उठ कर केवल पंडवानी की कापालिक शैली गाथा कला साधिका की श्रेष्ठताओं जनमानस के मध्य अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वहीं उनकी अंतिम यात्रा से लेकर राजकीय सम्मान के साथ उनके निवास स्थल पर उनके पार्थिव शरीर पर नियमपूर्वक तिरंगा अर्पित करने, सैनिक टुकड़ी द्वारा अंतिम सलामी और मौन श्रद्धांजलि अर्पित करने, सामाजिक नियमानुसार अंत्येष्टि करने, राष्ट्रीय ध्वज को परिजनों को सम्मानजनक ढंग से समर्पित करने और अंत में दशगात्र के दिन देश, प्रदेश एवं विदेशों से कला प्रेमियों, कला साधकों और छत्तीसगढ़ की पंडवानी विधा, भरथरी , लोक गीत, बॉंस गाथा के चर्चित, बाल और युवा पीढ़ी के कलाकारों ने पद्म विभूषित डॉ. तीजन बाई को अपनी गुरु माता के रुप में स्वीकार करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इन दृश्यों, प्रस्तुतियों को स्थानीय अखबारों में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया। इसका वृहद संकलन जनजाति शोधार्थी, सेवानिवृत्त के प्रधान पाठक एवं लोक संस्कृति कर्मी राम कुमार वर्मा भिलाई 3 द्वारा शब्द सुमन के रुप में संकलित किया गया है।

इनके द्वारा पंडवानी लोक गाथा की खबरों, पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित पृष्ठों का अब तक तीन एल्बम संग्रहित किया गया है, जिसमें पंडवानी लोक विधा के प्रसिद्ध गायकों पंडवानी पुरोधा स्व.झाड़ूराम देवांगन, पंडवानी के प्रकाश स्तंभ पद्मश्री स्व. पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका व पुरवाई एवं पंडवानी की नई प्रभा ऋतु वर्मा से संबंधित आलेखों का संकलन किया गया है, जो भविष्य के शोधार्थी, पाठकों, कला शिक्षकों, विद्यार्थियों, लोक कलाकारों सहित पंडवानी विधा को आगे अग्रसर करने वालों के अध्ययन के लिए बेहद उपयोगी रहेगा। इसी विचार से उन्होंने कठिन परिश्रम कर श्रद्धांजलि की खबरों को एक सौ से भी अधिक पृष्ठों में संकलित किया है। ‘शब्द सुमन’ के संकलन में प्रदेश सहित देश के विशिष्ट लोगों, कला साधकों, कलाकारों, साहित्यकारों एवं विशिष्ट जनों के श्रद्धांजलि के शब्द भी अभीलिखित हैं, जो भविष्य के संदर्भ के लिए उल्लेखनीय रहेगा। संकलन का यह कार्य आगे भी जारी रहेगा।

इसमें इनके परिजनों वीणा वर्मा, कुमारी वंदना वर्मा, ऐश्वर्य कुमार वर्मा, राजेश कुमार बंछोर सहित स्थानीय पत्रकार जनों विमल शंकर झा, संगीता सिंह, पुनीत कौशिक, कोमल वर्मा, टी.सूर्या, राजेन्द्र सोनबोईर, गोविन्द न्यूज चैनल,विजय लक्ष्मी चौहान, कला शिक्षा समुह के सदस्यों बी.व्ही. आर. मूर्ति, परस राम साहू, कृष्ण कुमार धुरंधर, देवेन्द्र कुमार बंछोर, किरण बाला वर्मा, मोहित शर्मा, खिलेश वर्मा, लखेश्वर साहू, डॉ. दुलारी चंद्राकर, डा. संगीता चंद्राकर, हेमंत कुमार मढ़रिया, लिलेश्वररी चंद्राकर पुष्पा चौधरी, वरुण निषाद आदि का विशेष सहयोग रहा है। इस संकलन का अवलोकन कर पारधी जनजाति महासभा के प्रदेशाध्यक्ष चैतराम मालिया, युवा अध्यक्ष शिव राज पारधी, जिला अध्यक्ष कमलेश पारधी, सुरेश पारधी सहित डा. तीजन बाई के परिजनों ने इसे भविष्य की पीढियों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।

Link : https://shricgnewscreator.com/tribal-researcher-ram-kumar-has-compiled-a-tribute-in-words-to-padma-vibhushan-dr-teejan/

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