विशेषज्ञों ने कहा जागरूकता, समय पर जांच और विवाह पूर्व स्क्रीनिंग से रोकी जा सकती है बीमारी
भिलाई, विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिलाई-3 में जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, बचाव, उपचार तथा समय पर जांच के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही लोगों से इस अनुवांशिक बीमारी के प्रति जागरूक रहने की अपील की गई।
कार्यक्रम में बीईटीओ सैय्यद असलम ने बताया कि सिकल सेल रोग के प्रति जन-जागरूकता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल के प्रमुख रूप एसएस (SS) और एएस (AS) होते हैं। छत्तीसगढ़ में इस बीमारी को आमतौर पर हंसिया रोग के नाम से जाना जाता है। इस रोग में रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिया या नुकीले आकार की हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी, हाथ-पैरों एवं जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
सिकल सेल एक प्रकार का एनीमिया
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिलाई-3 के मेडिकल ऑफिसर डॉ. शिखर अग्रवाल ने बताया कि सिकल सेल एक प्रकार का एनीमिया रोग है, जिसमें शरीर में खून की कमी हो जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस बीमारी के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों को राहत मिल रही है।
मरीजों को मिल रही विशेष सरकारी सुविधाएं
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भुवनेश्वर कुमार कठौतिया ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार सिकल सेल रोगियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी उपलब्ध करा रही है। इससे मरीजों को वही सुविधाएं मिल सकेंगी, जो अन्य दिव्यांगजनों को प्रदान की जाती हैं।
25 बालिकाओं की हुई जांच
कार्यक्रम के दौरान लैब टेक्नीशियन आलिया खातून द्वारा 25 बालिकाओं का रक्त परीक्षण कर सिकल सेल की जांच की गई। उन्होंने बताया कि सिकल सेल रोगियों को समय-समय पर अपना हीमोग्लोबिन (एचबी) परीक्षण कराते रहना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज में मरीजों को रक्त भी चढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नियमित दवा सेवन, योग, संतुलित खान-पान और पौष्टिक आहार अपनाकर इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
विवाह पूर्व जांच को बताया सबसे प्रभावी उपाय
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भुवनेश्वर कुमार कठौतिया एवं जिला सिकल सेल समन्वयक प्रीतिका प्रवार ने कहा कि सिकल सेल एक अनुवांशिक रोग है, जो माता-पिता से बच्चों में पहुंचता है। इसलिए विवाह से पहले सिकल सेल की जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विवाह पूर्व स्क्रीनिंग इस बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है तथा आने वाली पीढ़ियों को इस रोग से बचाने में मददगार साबित होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सिकल सेल रोग के प्रति जागरूक बनें, समय पर जांच कराएं और आवश्यक सावधानियों का पालन कर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।






