उच्च शिक्षा विभाग पर मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या का आरोप, जुलाई-अगस्त की लंबित पेंशन जारी करने और सितंबर से बंद पेंशन बहाल करने की मांग
भिलाई, छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन बंद किए जाने के मामले में अनुदानित शिक्षक संघ, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय भिलाई ने आक्रोश जताया है। संघ ने आरोप लगाया है कि उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को पहले से मिल रही पेंशन से भी वंचित कर दिया है।
सेवानिवृत्त प्राध्यापक संघ के प्रो. डीएन शर्मा और डॉ. आरपी अग्रवाल तथा अनुदानित शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा और सचिव डॉ. अनुराग पांडेय ने कहा कि मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया प्रस्ताव शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों को उनके सेवानिवृत्ति के समय लागू वेतनमान के अनुरूप पेंशन एवं उपदान देने से संबंधित था। मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को नियमों में प्रावधान नहीं होने तथा लोकहित में न होने के आधार पर अमान्य किया था।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, मंत्रिपरिषद के निर्णय में कहीं भी पहले से स्वीकृत और वर्षों से प्रदान की जा रही पेंशन को बंद करने का निर्देश नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि निर्णय का आशय केवल प्रस्तावित संशोधित व्यवस्था को स्वीकृति नहीं देने से था।
1 और 11 सितंबर के आदेश पर सवाल
संघ ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग ने 1 सितंबर 2026 और 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों की वर्तमान पेंशन रोक दी। साथ ही कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की पात्रता समाप्त किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। संघ ने इसे मंत्रिपरिषद के निर्णय की सीमा से परे की कार्रवाई बताया है।
करीब 37 वर्षों से मिल रही पेंशन

संघ के अनुसार, अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को राज्य शासन की ओर से करीब 37 वर्षों से पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ मिलता रहा है। 26 अक्टूबर 2010 के शासनादेश के अनुसार पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन तथा चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी दिए जाने की व्यवस्था रही है।
संघ का कहना है कि शिक्षकों की मांग नई पेंशन व्यवस्था लागू करने की नहीं, बल्कि जिस वेतनमान में वे सेवानिवृत्त हुए हैं, उसी के अनुरूप पेंशन निर्धारित करने की है। पदाधिकारियों ने शासन से समान न्याय और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
जुलाई-अगस्त की पेंशन भी लंबित
सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने कहा कि पेंशन उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि लंबे समय तक की गई सेवा के बाद प्राप्त सामाजिक सुरक्षा का आधार है। वृद्धावस्था में चिकित्सा, दवाइयों और पारिवारिक आवश्यकताओं के लिए अनेक पेंशनभोगी इसी राशि पर निर्भर हैं। जुलाई और अगस्त की पेंशन का भुगतान लंबित रहने तथा सितंबर से पेंशन बंद होने से उनके सामने आर्थिक परेशानी उत्पन्न हो गई है।
चार प्रमुख मांगें रखीं
संघ ने राज्य शासन से 1 सितंबर और 11 सितंबर 2026 के आदेश वापस लेने, सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पूर्ववत पेंशन तत्काल बहाल करने तथा जुलाई-अगस्त सहित सभी लंबित पेंशन का भुगतान करने की मांग की है। इसके साथ ही कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की पात्रता पूर्ववत सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
संघ ने मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पेंशन शीघ्र बहाल नहीं की गई तो प्रभावित शिक्षक एवं कर्मचारी लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
जारीकर्ता: डॉ. सुधीर शर्मा, अध्यक्ष एवं डॉ. अनुराग पांडेय, सचिव, अनुदानित शिक्षक संघ, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई।
Link : https://shricgnewscreator.com/the-council-of-ministers-had-proposed-pension-based-on-revised-pay-scales-there-was-no-proposal-to-discontinue-the-old-pension-scheme/













