एआईएनए हेरिटेज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रोजेक्ट में साहित्यिक योगदान पर मिला वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान
भिलाई, नकुड़ (सहारनपुर), नकुड़ क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षक, कवि एवं साहित्यकार सुनील कुमार खुराना ने हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनका नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। उन्हें एआईएनए हेरिटेज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रोजेक्ट के अंतर्गत साहित्यिक योगदान के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड लिटरेरी पार्टिसिपेशन ऑनर सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें ‘मानव और पर्यावरण’ विषय पर रचनात्मक सहभागिता के लिए प्रदान किया गया।
यह विश्व स्तरीय साहित्यिक अभियान हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और साहित्यिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस परियोजना का संचालन एआईएनए – एआई पावर्ड हिंदी लिटरेरी इकोसिस्टम के माध्यम से किया गया। परियोजना का नेतृत्व डॉ. ममता सैनी, संस्थापक एवं प्रोजेक्ट निदेशक, डिजिटल एरा लिंक ने किया, जबकि अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच ने इसका सांस्कृतिक सहयोग किया।
सुनील कुमार खुराना को जारी सम्मान प्रमाण-पत्र की आईडी एआईएनए-डब्ल्यूआर-000446 है, जिसे 15 जुलाई 2026 को जारी किया गया। प्रमाण-पत्र पर अंकित क्यूआर कोड के माध्यम से इसकी प्रामाणिकता भी सत्यापित की जा सकती है।

वर्तमान में उच्च प्राथमिक विद्यालय बाधी, नकुड़ (सहारनपुर) में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत सुनील कुमार खुराना पिछले कई वर्षों से साहित्य सृजन में सक्रिय हैं। पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ, वृक्षारोपण, नारी सशक्तिकरण, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर उनकी 200 से अधिक रचनाएं विभिन्न साझा काव्य संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी अनेक रचनाएं सत्य घटनाओं पर आधारित हैं, जो समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता का संदेश देती हैं।
सुनील कुमार खुराना ने बताया कि उनकी कविताओं को लिखंतू वेबसाइट पर पिछले पांच महीनों में 16 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। इसके अलावा उनकी एक कविता का प्रसारण फरवरी 2025 में आकाशवाणी नजीबाबाद से ऑल इंडिया रेडियो पर भी हुआ था, जिसे श्रोताओं ने सराहा।
वर्ष 2026 उनके साहित्यिक जीवन के लिए विशेष उपलब्धियों वाला वर्ष रहा है। इस वर्ष उन्हें लगातार तीन अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें काव्य हिन्दुस्तान साहित्य शिखर सम्मान, कवि शिरोमणि सम्मान तथा अब गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सम्मान शामिल हैं।
उनकी इस उपलब्धि पर शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं विभिन्न सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल सुनील कुमार खुराना की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे नकुड़, सहारनपुर और हिंदी साहित्य जगत के लिए गौरव का विषय है। उनके इस सम्मान से क्षेत्र के युवा साहित्यकारों और विद्यार्थियों को भी नई प्रेरणा मिलेगी।
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