कबीर प्राकट्य महोत्सव मनाया गया

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कबीर धाम गोकुलनगर पुलगांव दुर्ग में कबीर प्राकट्य महोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया गया । ध्वजारोहण, कबीर साहेब की मूर्ति पर माल्यार्पण और आरती पश्चात भजन, सत्संग का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ ।
संत निकटेश्वर साहेब ने कहा कि हर मनुष्य में आत्मा के रूप में ज्ञानस्वरूप अंतर ज्योति है, उसे ही जानना हमारा लक्ष्य होना चाहिए और यह लक्ष्य सत्संग में संत गुरुजनों के सानिध्य से ही प्राप्त हो सकता है ।

साध्वी सुबुद्धि साहेब ने कहा कि शरीर छूटने के बाद ही मनुष्य के अच्छे बुरे कर्मों को याद किया जाता है, कबीर साहेब को हम इसीलिए याद करते हैं क्योंकि उन्होंने संसार में फैली तमाम बुराईयों, पाखंडों, आडंबरों का खंडन कर मनुष्य को सच्ची राह दिखाई ।

संत पूर्णेंद्र साहेब ने कहा कि हर प्राणी में जीव होता है लेकिन मनुष्य मात्र में वही जीव आत्मा कहलाती हैं क्योंकि उसी में विवेक का गुण निहित होता है, परंतु आज के मनुष्य का विवेक मर चुका है इसलिए अनादि काल से सांसारिक बंधनों में बंधा है । भजन का अर्थ शांत हो जाना और इसके लिए उसके अपने साथ जो भी अच्छा बुरा हो उसे भूलते चले जाएं।

मुख्य प्रवक्ता संत शीतल साहेब ने कहा कि भजन सत्संग जरूर करना चाहिए क्योंकि उससे विवेक जागृत होता है, अन्यथा वह एक दिखावा ही है । कबीर साहेब को एक सच्चे संत के रूप में है याद करते हैं और हमें सच्चे संत की शरण लेनी चाहिए तभी हम भटकने से बच सकते हैं ।
उन्होंने समिति के पदाधिकारियों सदस्यों से आव्हान किया कि इस आश्रम के विकास के लिए शासकीय अनुदान की आशा छोड़ स्वयं निस्वार्थ भाव से आगे आएं । उनके इस आव्हान पर उपस्थित सभी संतों, भक्त गानों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया और अपनी ओर से आर्थिक मदद की घोषणा की ।
साध्वी विजयलक्ष्मी, महंत रेखदास साहेब, महंत डेरहा साहेब, भावेश साहू आदि उपस्थित रहे।

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