पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, सांसद विजय बघेल सहित कई दिग्गज नेताओं ने पहुंचकर लिया कथावाचक पं. युवराज पांडेय का आशीर्वाद
भिलाई, श्रीजगन्नाथ सेवा समिति के तत्वावधान में नगर निगम मंगल भवन के सामने स्थित मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में इन दिनों श्रद्धा और भक्ति की अविरल धारा बह रही है। कथा के छठवें दिन राष्ट्रीय कथावाचक पंडित युवराज पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण के महारास और रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक रस में सराबोर नजर आए। आयोजन में क्षेत्र के कई दिग्गज जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति भी आकर्षण का केंद्र रही।

पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद सहित दिग्गज नेताओं ने लिया आशीर्वाद
भागवत कथा के छठवें दिन विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, दुर्ग सांसद विजय बघेल, डोंगरगढ़ पूर्व विधायक भुनेश्वर बघेल, राजेंद्र साहू, मुकेश चंद्राकर और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू आयोजन स्थल पहुंचे। सभी जनप्रतिनिधियों ने व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक पंडित युवराज पांडेय से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया और श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण किया।
नेताओं के आयोजन स्थल पहुंचने पर श्रीजगन्नाथ सेवा समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया। जनप्रतिनिधियों ने धार्मिक आयोजन की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और आपसी सद्भाव को मजबूत करने वाला बताया।
महारास के आध्यात्मिक महत्व से कराया परिचित
कथा के दौरान पंडित युवराज पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण के महारास प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण और गोपियों का महारास केवल लौकिक प्रेम का प्रसंग नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन तथा अनन्य भक्ति का प्रतीक है। भगवान के प्रति गोपियों का समर्पण, प्रेम और निष्काम भक्ति प्रत्येक श्रद्धालु के लिए प्रेरणादायी है।

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ ईश्वर की शरण में जाता है, तब उसे परम आनंद की अनुभूति होती है। महारास के इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा पंडाल में भजन-कीर्तन और श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनकर झूम उठे श्रद्धालु
कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग रहा। कथावाचक पंडित युवराज पांडेय ने बताया कि विदर्भ नरेश की पुत्री रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य और पति मान चुकी थीं। लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। इस परिस्थिति में रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर अपनी व्यथा बताई और उन्हें विवाह से पूर्व आकर अपने साथ ले जाने का आग्रह किया।

भगवान श्रीकृष्ण ने भक्त की पुकार सुनकर रुक्मिणी का हरण किया और विधि-विधान से उनसे विवाह किया। इस प्रसंग के माध्यम से कथावाचक ने बताया कि भगवान अपने सच्चे भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं। सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा स्थल पर भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने जमकर उत्साह व्यक्त किया। विवाह प्रसंग के दौरान पूरा पंडाल उत्सव और उल्लास के वातावरण में डूबा नजर आया।

रोजाना पहुंच रहे बड़ी संख्या में श्रद्धालु
श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन को लेकर क्षेत्र के लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। भिलाई-3 सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्रीजगन्नाथ सेवा समिति की ओर से आयोजन स्थल पर बैठने और पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई है।

समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आयोजन को व्यवस्थित एवं सफल बनाने में लगातार जुटे हुए हैं। कथा के समापन पर विधिवत महाआरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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