औचक जांच में मरीजों से अतिरिक्त नकद राशि लेने और अनावश्यक भर्ती करने की पुष्टि, अस्पताल का स्पष्टीकरण अस्वीकार
भिलाई, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अनियमितताओं के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जुनवानी स्थित श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस पर बड़ी कार्रवाई की है। राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल का आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन तीन साल के लिए निरस्त कर दिया है। जांच में मरीजों से अतिरिक्त नकद राशि लेने और अनावश्यक रूप से मरीजों को भर्ती करने के तथ्य सामने आए हैं। विभाग ने इसे योजना के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन और गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है।
राज्य स्तरीय जांच दल ने 30 सितंबर 2026 को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। जांच में डीपीडी में पंजीकृत 35 मरीजों में से 24 मरीज अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। इनकी जानकारी एचएमआईएस अथवा आयुष्मान पोर्टल पर भी नहीं मिली। आठ मरीजों से फोन पर बातचीत में अस्पताल द्वारा अतिरिक्त नकद राशि लेने की बात सामने आई। विभिन्न वार्डों के रजिस्टरों में भी सही जानकारी दर्ज नहीं पाई गई। वहीं आयुष्मान योजना के रजिस्टर और एचएमआईएस में दर्ज कुछ मरीज मौके पर मौजूद नहीं थे।
इन अनियमितताओं को लेकर अस्पताल प्रबंधन को 11 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अस्पताल ने 12 अक्टूबर को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। प्रबंधन ने मरीजों की अनुपस्थिति के पीछे ईएसआईसी और आयुष्मान योजना के बिलिंग व क्लेम की प्रक्रिया, जांच रिपोर्ट मिलने में लगने वाले समय तथा एक मरीज के बिना सूचना अस्पताल छोड़ने जैसे कारण बताए। अतिरिक्त राशि लेने के आरोपों से भी इनकार किया।
हालांकि, राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल के जवाब को तथ्यात्मक और समाधानकारक नहीं मानते हुए अस्वीकार कर दिया। जांच दल की रिपोर्ट, मरीजों के बयान और मेडिकल फाइलों के परीक्षण के आधार पर अतिरिक्त राशि वसूली और अनावश्यक भर्ती किए जाने की पुष्टि मानी गई।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के जुलाई 2026 में जारी दिशा-निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की गई है। आदेश में अस्पताल को तीन साल तक आयुष्मान योजना के नए मरीज भर्ती नहीं करने और अस्पताल परिसर से योजना से संबंधित प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा फर्जी दावों (फ्रॉड क्लेम) की राशि का अलग से आकलन कर वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी। यह आदेश 3 नवंबर 2026 को जारी किया गया है।
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