छत्तीसगढ़ी गीतों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले गीतकार-वादक मदन शर्मा का निधन

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स्वर कोकिला लता मंगेशकर से छत्तीसगढ़ी गीत गवाने का सपना किया था साकार, “छुट जाही अँगना-बारी” से मिली खास पहचान

जन्म: 31 अगस्त 1946 , स्वर्गवास: 17 अप्रैल 2026

भिलाई, छत्तीसगढ़ी लोक-संगीत और सांस्कृतिक जगत के वरिष्ठ गीतकार, गायक एवं ढोलक वादक मदन शर्मा का आज निधन हो गया। उनके निधन से प्रदेश की सांस्कृतिक दुनिया में शोक की लहर है। करंजा, भिलाई निवासी मदन शर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और लंबे समय तक लोक मंचों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सेवा करते रहे।

31 अगस्त 1946 को जन्मे मदन शर्मा पेशे से शिक्षक थे और वर्ष 2008 में सेवानिवृत्त हुए। वे जितने कुशल गीतकार थे, उतने ही सिद्धहस्त ढोलक वादक और मंचीय कलाकार भी थे। प्रहसन और लोक प्रस्तुतियों में उनकी विशेष पहचान थी। वे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच ‘चंदैनी गोंदा’ और ‘सोनहा बिहान’ से लंबे समय तक जुड़े रहे।

मदन शर्मा का नाम उस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए विशेष रूप से याद किया जाएगा, जब उन्होंने स्वर कोकिला लता मंगेशकर से छत्तीसगढ़ी गीत गवाने का सपना पूरा किया। दरअसल, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में एक समारोह के दौरान उन्होंने यह संकल्प लिया था कि एक दिन वे लता जी से छत्तीसगढ़ी गीत जरूर गवाएंगे।

इसके लिए उन्होंने वर्ष 2004 में मुंबई जाकर प्रयास किए। प्रारंभ में स्वास्थ्य कारणों से लता जी तैयार नहीं हुईं, लेकिन उनकी छोटी बहन उषा मंगेशकर के सहयोग और निरंतर प्रयासों के बाद लता मंगेशकर राजी हुईं। उन्होंने फिल्म ‘भकला’ के लिए मदन शर्मा द्वारा लिखित प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीत “छुट जाही अँगना-बारी” को 22 फरवरी 2005 को अपनी आवाज में रिकॉर्ड किया। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ी संगीत जगत के लिए ऐतिहासिक मानी जाती है।

मदन शर्मा ने वर्ष 1982 में मुंबई की पॉलिडोर (म्यूजिक इंडिया लिमिटेड) के लिए रिकॉर्ड किए गए 36 छत्तीसगढ़ी गीतों में ढोलक वादन किया था। इनमें “मोर संग चलव रे”, “तोर खोपा मा फुंदरा”, “संगी के मया जुलुम होगे रे” जैसे कई लोकप्रिय गीत शामिल हैं, जो आज भी लोकजीवन में गूंजते हैं।

उनके लिखे गीतों को ममता चन्द्राकर, कुलेश्वर ताम्रकार और महादेव हिरवानी जैसे सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों ने अपनी आवाज दी और उन्हें जन-जन तक पहुंचाया।

मदन शर्मा के निधन पर ‘मया के सिंगार छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच’ सहित अनेक सांस्कृतिक संस्थाओं और कलाकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए छत्तीसगढ़ी कला और संस्कृति के प्रति उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

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