भिलाई, विट्ठल पुरम, एफ-ब्लॉक 503, भिलाई 3 स्थित डॉ. प्रेम कुमार पांडेय के आवास पर एक भव्य काव्य संध्या का सफल आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में कई राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त कवियों, गीतकारों और कलमकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिव्या सक्सेना द्वारा की गई, तथा मुख्य अतिथि के रूप में विजया भारती उपस्थित रहीं। इस गरिमामयी समारोह का कुशल संचालन कवि गजेंद्र द्विवेदी ने किया।

काव्य संध्या के मुख्य आकर्षण एवं प्रस्तुतियां:
पारुल पांडेय (स्त्री शक्ति प्रतिनिधि): कार्यक्रम का शानदार आगाज़ इनकी रचना ‘शौक’ के काव्य पाठ से हुआ।
संजय मैथिल: अपनी कविताओं ‘मोबाइल भावनाओं से दूर’ और ‘ज़माने वाले’ के माध्यम से समाज की दुर्बलताओं पर करारी चोट की।
युसूफ सागर: ‘बात पते की बोल गया हूँ’ और ‘ये दुनिया पागलखाना है’ के जरिए पारिवारिक मूल्यों का सुंदर चित्रण किया।
रियाज़ खान गौहर: अपनी रचना ‘जिंदगी भर वो जलाते रहे’ से महफ़िल में समां बाँध दिया।
मनमोहन मतवाला: अपनी पंक्तियों ‘यूं तो जज्बात लिए चलता हूँ’ से दर्शकों का दिल जीता और अपने गीत ‘मन झूमता है’ के जरिए स्व. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
ओम पांडेय (युवा पीढ़ी): अपनी कविताओं ‘रंगमंच’ और ‘कोहरा’ के माध्यम से समाज की वर्तमान स्थिति पर प्रासंगिक प्रश्न खड़े किए।
डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी: ‘बरसात के आलम का गुजर देख रहा हूँ’, हंसता हुआ मैं ‘खुद पे नगर देख रहा हूं। जैसी बेहतरीन रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया।
छगनलाल सोनी: अपनी क्षणिकाओं ‘मतदान लोकतंत्र की हार का महा उत्सव’ और ‘हवा एक विचारधारा है’ से सभी का ध्यान आकर्षित किया।
संतराम वर्मा: इन्होंने मंच पर जगदीश चक्रधारी जी की रचना को बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
गजेंद्र द्विवेदी (संचालक/कवि): अपनी रचना ‘दिन रात का क्या है गुजर ही जायेगा’ से श्रोताओं का मन मोह लिया।
डॉ. आर.बी. कुशवाहा: इनकी रचना ‘विश्व गुरु’ पर सदन में जमकर तालियां बजीं।
कार्यक्रम का समापन:
इस साहित्यिक संध्या का समापन कार्यक्रम के आयोजक डॉ. प्रेम कुमार पांडेय की प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने अपनी रचनाओं ‘भूख’ और ‘पाखंड’ के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं पर गहरा व्यंग्य किया। साथ ही, अपनी एक अन्य रचना ‘काव्यगोष्ठियों में लोकतंत्र’ के जरिए वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर भी करारा व्यंग्य किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं और साहित्य प्रेमियों द्वारा खूब सराहा गया। जयप्रकाश अग्रवाल, सुजाता, प्रतिमा पाण्डेय उपस्थित थे। सभी का आभार प्रतिमा पांडेय ने किया।
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