डॉ. रमन सिंह को ‘छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य जसगीत झांकी भाग-1’ की भेंट

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लोक संस्कृति कर्मी राम कुमार वर्मा ने बैगा जनजाति के अभिलेखीकरण और लोक संस्कृति संरक्षण पर किया विशेष आग्रह

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपरा को संरक्षित और शोधपरक स्वरूप देने की दिशा में लोक संस्कृति कर्मी एवं जनजाति शोधार्थी राम कुमार वर्मा द्वारा तैयार पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य जसगीत झांकी भाग-1’ की प्रति विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भेंट की गई। इस दौरान उन्होंने विशेष संरक्षित जनजाति बैगा समुदाय के जीवन, लोक साहित्य और संस्कृति के अभिलेखीकरण को प्रकाशित कराने का अनुरोध भी किया।

कार्यक्रम का आयोजन रायपुर के शंकर नगर स्थित विमतारा होटल सभागार में किया गया, जहां प्रदेशभर के विशिष्ट जन, वरिष्ठ साहित्यकार और लोक संस्कृति से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

राम कुमार वर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जसगीत की परंपरा लंबे समय से ग्रामीण अंचलों में जीवंत रही है। वर्ष 1986-88 के दौरान रामायण और महाभारत धारावाहिकों से प्रेरित होकर उन्होंने ग्रामीण कलाकारों द्वारा शीतला माता एवं महामाया माता मंदिरों में प्रस्तुत किए जाने वाले सेवा गीत, माता सेवा गीत और जसगीत को लोकनाट्य शैली में विकसित कर “जसगीत झांकी” के रूप में समृद्ध किया।

उन्होंने बताया कि महाभारत, श्रीमद्भागवत, गीता, रामचरितमानस तथा वेद-पुराणों के गहन अध्ययन के आधार पर प्रदेश के रचनाकारों द्वारा विशेष कथा-प्रसंगों की रचना की जा रही है, जिन्हें लोकनाट्य शैली में मंचित किया जाता है। इन प्रस्तुतियों को कलाकार छत्तीसगढ़ी लोक जीवन और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के अनुरूप तैयार करते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हें देखने बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं।

ग्रामीणों और समाजसेवियों के सहयोग से आयोजित जसगीत झांकी प्रतियोगिताओं में प्रदेश के लोक कलाकारों की प्रतिभा और सांस्कृतिक श्रेष्ठता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इन्हीं नाट्य रूपांतरणों और लोक प्रस्तुतियों को संकलित कर राम कुमार वर्मा ने पुस्तक का स्वरूप दिया है, जिसका प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग रायपुर द्वारा किया गया है।

इस अवसर पर राम कुमार वर्मा ने बैगा जनजाति के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण पर किए गए अपने शोध कार्य की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले की मैकल पर्वत श्रृंखलाओं में निवासरत राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा समुदाय की जीवनशैली, लोक साहित्य, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर का उन्होंने जमीनी स्तर पर अध्ययन किया है। इसके लिए वरिष्ठजनों से संवाद, सहभागिता और क्षेत्रीय अवलोकन के माध्यम से रंगीन चित्रों तथा शोधपरक आलेखों का संकलन तैयार किया गया है।

डॉ. रमन सिंह ने शोध कार्य और लोक संस्कृति संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की तथा राम कुमार वर्मा को इस दिशा में निरंतर कार्य करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

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