छत्तीसगढ़ की पहली खुली जेल दुर्ग में शुरू, 30 बंदी दिन में बाहर जाकर करेंगे काम

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डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने किया शुभारंभ, शाम को लॉकअप से पहले जेल लौटना होगा

छत्तीसगढ़ में पहली बार खुली जेल (ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन-ओसीआई) की शुरुआत दुर्ग केंद्रीय जेल से हुई है। मंगलवार 22 सितंबर को डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने केंद्रीय जेल परिसर में इसका शुभारंभ किया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक मनीष संभाकर सहित जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बंदी उपस्थित रहे। राज्य सरकार ने इस संबंध में 21 सितंबर को अधिसूचना जारी की थी।

खुली जेल की व्यवस्था सामान्य जेल से अलग होगी। इसमें निर्धारित पात्रता और नियमों के आधार पर चयनित बंदियों को जेल परिसर में रहने के साथ दिन में बाहर जाकर काम करने की अनुमति दी जाएगी। प्रारंभिक चरण में ओसीआई में 30 बंदियों को रखा जाएगा। ये बंदी सुबह निर्धारित कार्य के लिए जेल से बाहर निकलेंगे और काम पूरा करने के बाद शाम को लॉकअप होने के निर्धारित समय से पहले वापस जेल लौटेंगे। यानी यह पूरी तरह जेल से बाहर रहने की व्यवस्था नहीं होगी, बल्कि नियंत्रित परिस्थितियों में काम करने की सुविधा होगी।

दुर्ग केंद्रीय जेल में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए ओसीआई शुरू की गई है। बाहर काम करने वाले बंदियों को निर्धारित नियमों और निगरानी व्यवस्था का पालन करना होगा। समय पर जेल लौटना और अनुशासन बनाए रखना इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

जेल विभाग के अनुसार खुली जेल का उद्देश्य बंदियों को सुधार और पुनर्वास का अवसर देना है। जेल की सीमित व्यवस्था में रहने के बजाय पात्र बंदियों को काम करने, जिम्मेदारी निभाने और रोजगारपरक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें रिहाई के बाद सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने और आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।

छत्तीसगढ़ में पहली बार लागू की गई इस व्यवस्था के तहत बंदियों के चयन, कार्य और बाहर आने-जाने से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होगी। दुर्ग केंद्रीय जेल से शुरू हुई यह पहल बंदियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में नई व्यवस्था के रूप में सामने आई है।

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