पीपलसाना में ऑल इंडिया शेअ़री निशिस्त का शानदार आयोजन, शायरों ने बांधा समा

Editor
By Editor 4 Min Read

फ़राज़ अकेडमी में देर रात तक गूंजते रहे अशआर, देशभर से आए शायरों ने पेश किया बेहतरीन कलाम

भिलाई, उत्तर प्रदेश के पीपलसाना स्थित फ़राज़ अकेडमी में 5 मई 2026, मंगलवार की रात एक भव्य ऑल इंडिया शेअ़री निशिस्त का आयोजन किया गया। देर रात तक चली इस अदबी महफिल में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शायरों और साहित्य प्रेमियों ने शिरकत की तथा शानदार अशआर से महफिल को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम की सदारत हकीम जफर ने की, जबकि निजामत के फराइज सरफराज हुसैन फराज ने बखूबी अंजाम दिए। मुख्य अतिथि के रूप में इरफान हमीद काशीपुरी मौजूद रहे। वहीं मेहमान-ए-खुसूसी नसीम अख्तर भोजपुरी तथा मेहमान-ए-जी-वकार याकूब हुसैन राज रहे।

महफिल का आगाज मौलाना नियाज ने आयत-ए-करीमा की तिलावत से किया। इसके बाद अब्दुल हमीद बिस्मिल भोजपुरी ने नात पेश की। साबिर पीपलसानवी ने भी नातिया अशआर प्रस्तुत कर महफिल को रूहानी रंग दिया।

गजल के दौर की शुरुआत फरीद आलम कादरी ने की। इसके बाद एक से बढ़कर एक शायरों ने अपने कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
ज़ुबैर मुरादाबादी ने पढ़ा —
“मुद्दतों हम ने जमाने को दिया दर्से-हयात,
मुद्दतों तक हमें रोएंगे जमाने वाले।”

अशोक साहिब ने कहा —
“बदहालियों को मेरी न हंस-हंस के देखिए,
हूं वक्त का शिकार तमाशा नहीं हूं मैं।”

नियाज अजीजी ने अपने अशआर से महफिल में रंग भरते हुए कहा —
“अपने हाथों ही परेशान है उम्मत तेरी,
उस के उलझे हुए हालात को शाना दे-दे।”

नूर कादरी, साबिर माइल भोजपुरी, हाफिज सईदुर्रहमान, फरहत अली फरहत, अब्दुल करीम और डा. आजम बुराक ने भी शानदार कलाम पेश कर खूब दाद बटोरी।

सदारत कर रहे हकीम जफर ने अपने अंदाज में कहा —
“हार मेरी उसे गवारा नहीं,
इस लिए मैं किसी से हारा नहीं।”

मुख्य अतिथि इरफान हमीद काशीपुरी ने कहा —
“जो गुजर गया गैर इरादतन दूर रह के तुझसे,
वो हरेक लम्हा मुझे था यौम-ए-हिसाब सा कुछ।”

वहीं नसीम अख्तर भोजपुरी ने पढ़ा —
“जाते हुए यूं उसको पुकारा ही नहीं था,
वो शख्श हकीकत में हमारा ही नहीं था।”

उस्ताद शायर अकीम उद्दीन अकीम ने मजदूरों की जिंदगी पर असरदार अशआर पेश किए —
“मिट्टी की हरेक पेशानी पर चांदी का करम कब देखा है,
मजदूर के हाथों में तुमने सोने का कलम कब देखा है।”

नफीस पाशा ने समाजी संदेश देते हुए कहा —
“जुल्मों को मिटाने को भी तैयार रहो तुम,
मजलूम के हर लम्हा तरफदार रहो तुम।”

निजामत कर रहे सरफराज हुसैन फराज ने अपने मशहूर शेर से महफिल में खूब वाहवाही लूटी —
“जाम नजरों से पिलाने का हुआ था वादा,
टालिए मत हमें अंगूर का पानी दे कर।”

शेअरी निशिस्त में हाजी अमीर हुसैन, रियाज अंसारी, नातिक सुल्तान, मास्टर इंतेखाब, शाहिद हुसैन, मोहम्मद उमर, इंतेजार, सद्दाम हुसैन, अफसर अली, मोहम्मद शाहनवाज हुसैन, कशिश, शम्मी, रहनुमा, आलिमा, मास्टर फुरकान, हाफिज जीशान, शफी, रईस जहां, मोहम्मद निजाम, खालिद हापुड़ी, मोहम्मद फैज, इस्मत, रिजवाना, गुलशेर और दिलनवाज शौअरा हजरात  ने बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने शिरकत कर शायरों के कलामों को खूब सराहा।

कार्यक्रम के अंत में मुशायरा कन्वीनर रिजवाना नर्गिस ने सभी मेहमानों और शायरों का आभार व्यक्त करते हुए सफल आयोजन के लिए मुबारकबाद पेश की।

Share This Article