लखनऊ अग्निकांड के बाद भिलाई में अलर्ट, सिविक सेंटर के कोचिंग हब में फायर सेफ्टी की सघन जांच

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खिड़की फिक्स, वेंटिलेशन नहीं और दिखी अग्निशमन यंत्र की कमी

कुछ संस्थानों को किया गया सील, कुछ को सुधार की दी गई चेतावनी

भिलाई, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस हादसे से सबक लेते हुए स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इसी कड़ी में, भिलाई के सबसे बड़े शैक्षणिक और व्यावसायिक केंद्र ‘सिविक सेंटर’ के आसपास संचालित हो रहे विभिन्न कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था की सघन जांच की गई। इस दौरान कुछ कोचिंग सेंटर का संचालन संकरी गलियों में होता पाया गया। वहीं खिड़कियां फिक्स रहने के साथ वेंटिलेशन भी नहीं पाया गया। कईं सेंटर में अग्निशमन यंत्र की कमी देखने को मिली।

गुरुवार को अग्निशमन एवं आपातकालीन विभाग दुर्ग और जिला प्रशासन की एक संयुक्त टीम ने सिविक सेंटर और उसके आसपास के कोचिंग हब का औचक निरीक्षण किया। जिला सेनानी नागेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। अधिकारियों ने संस्थानों में जाकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान यह जांचा गया कि क्या संस्थानों के पास वैध फायर एनओसी है, अग्निशमन यंत्र कार्यशील स्थिति में हैं या नहीं, और आपातकालीन निकासी (इमरजेंसी एक्जिट) की क्या व्यवस्था है। निरीक्षण के दौरान कईं गंभीर कमियां और अनियमितताएं सामने आईं। जांच टीम ने पाया कि कईं बहुमंजिला इमारतों में चल रहे कोचिंग सेंटरों में आपातकालीन निकास के रास्ते बेहद संकरे थे, तो कुछ स्थानों पर इन रास्तों पर कबाड़ या अन्य सामान रखकर उन्हें पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया था।

इसके अलावा, कईं संस्थानों में पर्याप्त संख्या में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले और जो मिले, उनमें से कुछ की रीफिलिंग की तारीख निकल चुकी थी। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने इन कमियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कोचिंग संचालकों को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुरक्षा मानकों को दुरुस्त नहीं किया गया और फायर एनओसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो संस्थानों को सील करने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल के दिनों में यह अभियान दुर्ग, नेहरू नगर और सुपेला जैसे अन्य कोचिंग हब में भी चलाया जा चुका है। प्रशासन ने सभी संचालकों से अपील की है कि वे केवल व्यावसायिक हितों पर ध्यान न देकर विद्यार्थियों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं।

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