पैरेंटिंग सत्र में बच्चों और शिक्षकों को किया संबोधित, दुर्ग न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए बताया कर्त्तव्य और अधिकार के बीच का अंतर
भिलाई, दुर्ग सत्र न्यायालय के एक हालिया ऐतिहासिक फैसले ने प्रदेश भर के अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाने वाले नाबालिग की लापरवाही से हुए सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के घायल होने के मामले में अदालत ने न केवल किशोर को, बल्कि उसे मोटरसाइकिल उपलब्ध कराने वाले पिता को भी तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है।
इस महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले पर इस्पात नगरी भिलाई के जाने-माने शिक्षाविद और सर्टिफाइट पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने प्रतिक्रिया दी है। स्थानीय एक निजी स्कूल में बच्चों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने सुझाव देते हुए कहा है कि बच्चों की गलतियों की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी सीधे तौर पर माता-पिता की भी होनी चाहिए।
आधुनिक परवरिश के नाम पर खतरनाक होती लापरवाही
चिरंजीव जैन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में कई माता-पिता बच्चों की हर मांग को बिना सोचे-समझे पूरा करना, उन्हें कम उम्र में वाहन थमा देना, देर रात तक बाहर रहने की खुली छूट देना और उनकी गतिविधियों पर नजर न रखना ‘मॉडर्न पेरेंटिंग’ (आधुनिक परवरिश) समझ बैठे हैं। कई बार तो अभिभावक बच्चों की गंभीर गलतियों को भी छिपाने और उन्हें बचाने का प्रयास करते हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने स्पष्ट किया:”बच्चों से प्रेम करने का अर्थ उनकी हर गलती को नजरअंदाज करना बिल्कुल नहीं है। नाबालिग होने का मतलब यह कतई नहीं है कि उन्हें कानून और सामाजिक मर्यादाओं का पालन करने से छूट मिल जाए। बच्चों को स्वतंत्रता जरूर दीजिए, लेकिन उसके साथ अनुशासन और जिम्मेदारी भी सिखाइए।”
अदालत का फैसला: माता-पिता के लिए एक कड़ा संदेश
दुर्ग सत्र न्यायालय के फैसले को मील का पत्थर बताते हुए पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने कहा कि यह निर्णय इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बच्चों को बिना अनुशासन के खुला छोड़ना समाज और खुद उस बच्चे के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माता-पिता बच्चे के पहले शिक्षक होते हैं। बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों का बोध कराना, उन्हें अनुशासन सिखाना और गलतियों के परिणामों से परिचित कराना माता-पिता का प्राथमिक कर्तव्य है। जहाँ अभिभावकों की जानबूझकर की गई लापरवाही या कानून का उल्लंघन प्रमाणित होता है, वहाँ उनकी जवाबदेही तय होना न्यायसंगत है। सच्चा प्रेम बच्चों को बचाना नहीं, उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
बच्चों की हर जिद के आगे घुटने न टेकें
श्री जैन ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की हर जिद के आगे घुटने न टेकें। उन्होंने कहा: “अच्छी पेरेंटिंग का अर्थ बच्चों को हर सजा से बचाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा जिम्मेदार नागरिक बनाना है कि वे कभी गलत रास्ते पर चलें ही नहीं। बच्चों की गलतियों को संरक्षण देना असल प्यार नहीं, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के साथ एक प्रकार का अन्याय है।” उन्होंने बच्चों से बात करते हुए कर्त्तव्य और अधिकार की बीच के अंतर को भी समझाया। वहीं बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए।
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