भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति, समुद्र मंथन और भगवान राम के आदर्शों का किया वर्णन; श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु
भिलाई, जीवन में संघर्ष और साधना के बिना किसी भी बड़ी उपलब्धि अथवा अमृत की प्राप्ति संभव नहीं है। मनुष्य को निष्काम भाव से भक्ति करते हुए अपने कर्मपथ पर आगे बढ़ना चाहिए। कर्म करना अनिवार्य है, क्योंकि परिश्रम और साधना से ही जीवन में सफलता का सुफल प्राप्त होता है। यह बात राष्ट्रीय कथा वाचक पं. युवराज पांडेय ने कही।
वे श्री जगन्नाथ सेवा समिति भिलाई-3, चरोदा की ओर से मंगल भवन के सामने मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे थे। इस दौरान उन्होंने भक्त प्रहलाद चरित्र, समुद्र मंथन, सूर्यवंश, भगवान श्रीराम के आदर्शों और कंस के अत्याचारों से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रही प्रहलाद की भक्ति
पं. युवराज पांडेय ने भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को भगवान की भक्ति से विमुख करने के लिए अनेक प्रयास किए। उन्हें डराया, धमकाया और यहां तक कि मारने की भी कोशिश की, लेकिन प्रहलाद की आस्था और श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई। तमाम यातनाओं और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वे भगवान विष्णु की भक्ति में अडिग रहे।
उन्होंने कहा कि जब भक्त पर अत्याचार की सीमा पार हो गई और हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद की आस्था को चुनौती देते हुए भगवान के अस्तित्व पर सवाल उठाया, तब भगवान ने खंभे से प्रकट होकर नरसिंह अवतार धारण किया और अपने भक्त की रक्षा की। यह प्रसंग बताता है कि सच्ची श्रद्धा और निष्काम भक्ति के सामने अहंकार और अत्याचार अधिक समय तक टिक नहीं सकते।

समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्न, शिव ने धारण किया हलाहल विष
कथावाचक ने इसके बाद समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई। इस मंथन से अमृत के साथ हलाहल विष भी निकला, जिससे समस्त सृष्टि पर संकट उत्पन्न हो गया। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से वे नीलकंठ कहलाए।
उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि दूसरों के कल्याण के लिए त्याग और समर्पण का भाव रखना ही सच्ची महानता है। मनुष्य को भी अपने जीवन में परोपकार, सेवा और त्याग के गुण अपनाने चाहिए।

भगवान राम की कथा अनुकरणीय, श्रीकृष्ण की कथा श्रवणीय
पं. पांडेय ने सूर्यवंश और भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम का जीवन आदर्श, मर्यादा, सत्य और धर्म का प्रतीक है। उनकी कथा अनुकरणीय है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण की कथा श्रवणीय है। भगवान राम ने अपने आचरण से समाज को सत्य, धर्म, कर्तव्य और मर्यादा के पालन का संदेश दिया।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में अनुशासन बनाए रखना, सत्य के मार्ग पर चलना और अपनी मर्यादाओं का पालन करना बेहद आवश्यक है। व्यक्ति के विचार और व्यवहार में धर्म तथा नैतिकता का समावेश होना चाहिए। भगवान राम का चरित्र प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।
धर्म की ग्लानि होने पर प्रभु लेते हैं अवतार
कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले की घटनाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ने लगता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।

उन्होंने बताया कि कंस की बहन देवकी के विवाह के समय आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र ही कंस के विनाश का कारण बनेगा। यह सुनकर कंस भयभीत हो गया और उसने क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दीं। उसने अपनी बहन देवकी और बहनोई वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया।
पं. पांडेय ने बताया कि कंस ने देवकी की संतानों को जन्म लेते ही मार डाला। उसने स्मर, उद्गीथ, परिषद, पतंग, क्षुद्रभृत् और घृणि नामक संतानों को भी कारागार में ही समाप्त कर दिया। इसके बाद भगवान की योगमाया से संकर्षण के रूप में बलराम का गर्भ रोहिणी के गर्भ में पहुंचाया गया। कंस के अत्याचार लगातार बढ़ते गए और भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की भूमिका तैयार हुई।
मुक्तेश्वरी बघेल और स्मिता बघेल ने किया कथा श्रवण
रविवार को आयोजित कथा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल अपनी बेटी स्मिता बघेल के साथ पहुंचीं। उन्होंने व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक पं. युवराज पांडेय से आशीर्वाद लिया और श्रद्धाभाव से कथा का श्रवण किया।

श्री जगन्नाथ सेवा समिति भिलाई-3, चरोदा के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन का संचालन समिति प्रमुख सुजीत बघेल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं।
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