रात 10 बजे बाद डीजे पर रोक, पंडाल के लिए अनुमति और सुरक्षा ऑडिट जरूरी; 50 से अधिक संचालकों की बैठक में दिए निर्देश
दुर्ग, आगामी त्योहारों को देखते हुए दुर्ग पुलिस और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था, यातायात, ध्वनि प्रदूषण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर-6 में डीजे, साउंड सिस्टम, पंडाल और किराया भंडार संचालकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के 50 से अधिक संचालक और डीजे संचालक संघ के पदाधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने त्योहारों के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर शोभराज अग्रवाल, नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग हर्षित मेहर, नगर पुलिस अधीक्षक छावनी प्रशांत पैकरा, नगर पुलिस अधीक्षक भिलाई नगर निशांत पाठक सहित पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि त्योहारों के दौरान धार्मिक एवं सार्वजनिक आयोजनों में डीजे, साउंड सिस्टम और पंडालों का उपयोग बढ़ जाता है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण, यातायात बाधित होने और आगजनी जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए पहले से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
रात 10 बजे बाद नहीं बजेंगे डीजे
डीजे और साउंड सिस्टम संचालकों को निर्देश दिया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर ही किया जाए। क्षेत्र के परिवेशीय ध्वनि स्तर से 10 डीबी(A) से अधिक अथवा 75 डीबी(A) से अधिक ध्वनि नहीं की जा सकेगी। दोनों में जो सीमा कम होगी, वही मान्य होगी। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्र और वाद्य यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
पुलिस ने संचालकों को एनजीटी, शासन, कोलाहल अधिनियम तथा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करने कहा है। डीजे संचालकों को ध्वनि मापक यंत्र भी साथ रखने और उसी के आधार पर निर्धारित सीमा में साउंड संचालित करने के निर्देश दिए गए। वाहनों पर ध्वनि विस्तारक यंत्र या वाद्य यंत्रों का उपयोग नहीं करने की भी हिदायत दी गई।
अस्पताल और स्कूल के आसपास साइलेंस जोन
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, जिला एवं सत्र न्यायालय तथा अन्य न्यायालय और शासकीय कार्यालयों की 100 मीटर सीमा को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कोलाहल प्रतिबंधित क्षेत्र यानी जोन ऑफ साइलेंस माना जाएगा। इन क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का विशेष रूप से पालन करना होगा।
व्हाइट मार्किंग के पीछे ही लगेंगे पंडाल
पंडाल संचालकों को निर्देशित किया गया कि पंडाल केवल निर्धारित व्हाइट मार्किंग के पीछे ही लगाए जाएं। मुख्य मार्ग, आवागमन और आपातकालीन रास्तों को किसी भी स्थिति में बाधित नहीं किया जाए। पंडाल लगाने से पहले नगर निगम और संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति एवं अनापत्ति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
फायर और इलेक्ट्रिसिटी सेफ्टी पर जोर
पुलिस ने पंडाल संचालकों को फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिसिटी सेफ्टी के निर्धारित मानकों का पालन करने कहा। पंडाल की क्षमता और संरचना का आवश्यक सुरक्षा ऑडिट कराने के बाद ही आयोजन करने के निर्देश दिए गए, ताकि त्योहारों के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।
हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी
पुलिस ने संचालकों को माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा प्रकरण WPPIL(C)-88/2023 में 20 नवंबर 2023 को पारित निर्देशों के साथ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने कहा।
शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग की अपील
दुर्ग पुलिस ने डीजे, साउंड सिस्टम, पंडाल और किराया भंडार संचालकों से अपील की कि त्योहारों के दौरान नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए ही आयोजन करें। ध्वनि प्रदूषण, यातायात अवरोध और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन न करें। पुलिस ने कहा कि नियमों के पालन से त्योहार शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराए जा सकेंगे।
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