गोल्डन आवर में इलाज सुनिश्चित करने दुर्ग यातायात पुलिस की नई पहल

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सड़क हादसों में घायलों को जल्द चिकित्सा सहायता देने डायल-112 और 108 एंबुलेंस सेवा के साथ हुई समन्वय बैठक, ब्लैक स्पॉट पर एंबुलेंस तैनाती पर सहमति

दुर्ग, सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को ‘गोल्डन आवर’ के भीतर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दुर्ग यातायात पुलिस ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में मंगलवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) कार्यालय, नेहरू नगर में यातायात पुलिस, डायल-112 और 108 एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों की संयुक्त समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में दुर्घटना के बाद न्यूनतम समय में राहत और उपचार उपलब्ध कराने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में डायल-112 के संभाग प्रभारी आसिम खान और 108 एंबुलेंस सेवा के दुर्ग प्रभारी निर्मल वर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सड़क दुर्घटनाओं के दौरान गोल्डन आवर का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने, घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने तथा शीघ्र अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले के राष्ट्रीय राजमार्गों और दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि दुर्घटना की सूचना मिलते ही राहत दल तत्काल मौके पर पहुंच सके और घायलों को बिना विलंब चिकित्सा सुविधा मिल सके।

इन प्रमुख स्थानों पर रहेगी विशेष व्यवस्था

दुर्घटना संभावित स्थानों को प्राथमिकता देते हुए निम्न क्षेत्रों में आवश्यकता अनुसार एंबुलेंस उपलब्ध कराने पर सहमति बनी

  • एमएलटी क्रेन, खुर्सीपार
  • बिजली ऑफिस, भिलाई-3
  • बड़े तरिया, कुम्हारी
  • जेके लक्ष्मी सीमेंट क्षेत्र
  • पंथी चौक

बैठक में डायल-112 और 108 एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों ने जनहित एवं सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन स्थानों पर बेहतर समन्वय के साथ एंबुलेंस उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

सड़क हादसों में मौतें कम करना है उद्देश्य

यातायात पुलिस का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को गोल्डन आवर के भीतर उपचार उपलब्ध कराना जीवन बचाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित राहत व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि दुर्घटना के बाद सहायता मिलने में किसी प्रकार की देरी न हो और अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।

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