बेटियों में संस्कार, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा का संचार, 10 दिवसीय आवासीय आध्यात्मिक शिविर का समापन

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115 से अधिक बालिकाओं ने आध्यात्म, अनुशासन, सेवा और आधुनिक तकनीक की समझ हासिल की, देशभर से पहुंचीं प्रतिभागी

भिलाई, बच्चों में संस्कार और नैतिक मूल्यों का विकास परिवार और समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को लेकर श्री महाकौशल जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ द्वारा कई वर्षों बाद बेटियों के लिए 10 दिवसीय आवासीय आध्यात्मिक शिविर का आयोजन किया गया। ऋषभ भवन में आयोजित इस शिविर के समापन समारोह में प्रतिभागियों के अनुभव और उनमें आए सकारात्मक बदलाव चर्चा का विषय बने रहे।

शिविर में कैवल्यधाम से आई जैन साध्वियों ने बालिकाओं को आध्यात्म, नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्यों का प्रशिक्षण दिया। समापन अवसर पर साध्वी हंसकीर्ति ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को अपने धर्म, संस्कृति और समाज की विशेषताओं से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा से जुड़कर बेटियां न केवल अपने परिवार का मान बढ़ाएंगी बल्कि समाज में भी सकारात्मक भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों को सही दिशा देने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे शिविरों के माध्यम से बालिकाओं को अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है, जिससे उनका व्यक्तित्व संतुलित और मजबूत बनता है।

मोबाइल और टीवी से दूरी बनाकर आत्मचिंतन का अवसर

शिविर की विशेषता यह रही कि प्रतिभागी बालिकाओं ने दस दिनों तक मोबाइल फोन, टीवी और रोजमर्रा की व्यस्त दिनचर्या से दूरी बनाकर स्वयं के साथ समय बिताया। इस दौरान उन्होंने ध्यान, प्रार्थना, अध्ययन, सेवा कार्य और समूह गतिविधियों में भाग लिया। आयोजकों के अनुसार शिविर समाप्ति तक बालिकाओं के व्यवहार, आत्मविश्वास और सोच में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

शिविर में शामिल कई बालिकाओं ने बताया कि उन्हें धैर्य, अनुशासन, समय प्रबंधन और आत्मनियंत्रण जैसे गुणों को व्यवहार में उतारने का अवसर मिला। साथ ही उन्होंने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से समझा।

नैतिक शिक्षा के साथ एआई और साइबर सुरक्षा की भी जानकारी

समापन समारोह के मुख्य अतिथि नि:शक्तजन आयोग के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने कहा कि शिविर में बालिकाओं को नैतिक शिक्षा, जैन धर्म के सिद्धांतों तथा परिवार के सदस्यों के साथ बेहतर व्यवहार की सीख दी गई। इसके अलावा वर्तमान समय की चुनौतियों को देखते हुए उन्हें आत्मरक्षा, महिला सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों की भी जानकारी प्रदान की गई।

उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में केवल धार्मिक और नैतिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि तकनीकी जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे शिविर बालिकाओं को संस्कारों के साथ आधुनिक ज्ञान से भी सशक्त बनाते हैं।

छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से पहुंचीं बालिकाएं

आयोजकों के अनुसार शिविर में 115 से अधिक बालिकाओं ने भाग लिया। इनमें छत्तीसगढ़ के बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, भिलाई, दुर्ग और रायपुर के अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा से भी प्रतिभागी शामिल हुईं।

समापन समारोह में बालिकाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिविर ने उनके जीवन में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे आवासीय शिविरों का आयोजन जारी रखने की बात कही।

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