शब्दाक्षर संस्था के साहित्यिक समारोह में जुटे देशभर के कवि, ग़ज़लकार और साहित्यप्रेमी, गुरु-शिष्य परंपरा का दिखा भावपूर्ण संगम
नई दिल्ली, 24 मई, 2026 राजधानी दिल्ली में साहित्य, संवेदना और शब्द-साधना से सजी एक यादगार शाम उस समय ऐतिहासिक बन गई, जब दिल्ली प्रदेश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘शब्दाक्षर’ द्वारा भव्य पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर देश के प्रख्यात छंद मनीषी एवं साहित्य-वाचस्पति नित्यानन्द वाजपेयी ‘उपमन्यु’ मुख्य अतिथि के रूप में विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार राजकुमार मिश्र ‘प्रतापगढ़ी’ के नवीन ग़ज़ल संग्रह ‘गुलिस्तां-ए-ग़ज़ल’ का भव्य लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों, कवियों, समीक्षकों एवं प्रबुद्धजनों की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक गरिमा प्रदान की। सभागार देर तक साहित्यिक चर्चाओं, ग़ज़लों और भावपूर्ण वक्तव्यों से गूंजता रहा।
गुरु-शिष्य परंपरा का भावनात्मक और प्रेरणादायी दृश्य
समारोह का सबसे विशेष और भावुक क्षण तब देखने को मिला, जब मुख्य अतिथि नित्यानन्द वाजपेयी ‘उपमन्यु’ ने अपने प्रिय शिष्य एवं रचनाकार राजकुमार मिश्र ‘प्रतापगढ़ी’ की साहित्यिक उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। गुरु और शिष्य के इस आत्मीय संबंध ने कार्यक्रम को एक विशिष्ट ऊंचाई प्रदान की।
अपने संबोधन में साहित्य-वाचस्पति उपमन्यु जी ने कहा कि किसी भी गुरु के लिए यह सबसे बड़ा संतोष और आत्मिक आनंद का विषय होता है कि उसका शिष्य साहित्य साधना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे। उन्होंने ‘गुलिस्तां-ए-ग़ज़ल’ को भावनाओं, संवेदनाओं और उत्कृष्ट भाषायी शिल्प का सुंदर संगम बताते हुए कहा कि यह संग्रह साहित्य प्रेमियों के हृदय को अवश्य स्पर्श करेगा।
साहित्यिक योगदान के लिए हुआ विशेष सम्मान
कार्यक्रम के दौरान संस्था ‘शब्दाक्षर’ की ओर से साहित्य-वाचस्पति नित्यानन्द वाजपेयी ‘उपमन्यु’ को उनके दीर्घकालीन साहित्यिक योगदान, काव्य-शास्त्र में विशिष्ट उपलब्धियों और नई पीढ़ी के रचनाकारों को मार्गदर्शन देने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने उन्हें शॉल, स्मृति चिह्न एवं सम्मान पत्र भेंट कर अभिनंदन किया।
सम्मान ग्रहण करते समय उपस्थित साहित्यकारों और अतिथियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उपमन्यु जी की साहित्यिक साधना और छंद ज्ञान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

‘गुलिस्तां-ए-ग़ज़ल’ को मिली साहित्यकारों की सराहना
लोकार्पण के पश्चात आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में कई वरिष्ठ कवियों और समीक्षकों ने ‘गुलिस्तां-ए-ग़ज़ल’ की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। वक्ताओं ने कहा कि संग्रह की ग़ज़लें पाठकों से सीधे संवाद स्थापित करती हैं और उनमें उरूज, बहर तथा शिल्प की सुंदर बारीकियां अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आई हैं।
साहित्यकारों ने राजकुमार मिश्र ‘प्रतापगढ़ी’ की लेखनी को संवेदनशील, समकालीन और प्रभावशाली बताते हुए कहा कि यह संग्रह आधुनिक ग़ज़ल साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान बनाने की क्षमता रखता है।
साहित्यिक इतिहास में यादगार बनी शाम
कार्यक्रम के अंत में संस्था ‘शब्दाक्षर’ के पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि, रचनाकार, साहित्यकारों और दूर-दराज से पहुंचे सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। पूरी शाम साहित्य, संस्कार और सृजनशीलता के अद्भुत समन्वय का प्रतीक बनी रही।
दिल्ली की यह साहित्यिक संध्या न केवल ‘गुलिस्तां-ए-ग़ज़ल’ के विमोचन के लिए याद की जाएगी, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, साहित्यिक सम्मान और रचनात्मक संवाद की प्रेरणादायी मिसाल के रूप में भी लंबे समय तक स्मरणीय रहेगी।




