फर्जी व्हाट्सएप डीपी लगाकर कंपनी डायरेक्टर बनकर की ठगी, रायपुर में ठिकाने बदल-बदलकर दे रहे थे वारदात को अंजाम
भिलाई, थाना सुपेला पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर कंपनी डायरेक्टर के नाम पर 20 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 20 हजार रुपये नगद, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज समेत बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की है। यह कार्रवाई थाना सुपेला एवं एसीसीयू की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
थाना सुपेला में अपराध क्रमांक 712/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। प्रार्थी यश बत्रा निवासी सुंदर नगर भिलाई ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी कंपनी साईराम व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते से अज्ञात व्यक्तियों ने फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर 20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
पुलिस के अनुसार कंपनी के तीनों डायरेक्टरों के बीच राशि के लेनदेन के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप संचालित होता था। विभिन्न ब्रांचों की आवश्यकता अनुसार उसी ग्रुप में रकम भेजने के संदेश डाले जाते थे और स्वीकृति मिलने पर अकाउंटेंट राशि ट्रांसफर करता था। आरोपियों ने इसी प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए कंपनी डायरेक्टर श्रीचंद बत्रा की फोटो लगाकर फर्जी व्हाट्सएप डीपी बनाई और अकाउंटेंट को विश्वास में लेकर एचडीएफसी बैंक खाते में 20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
होटल और किराए के मकानों में छिपकर चला रहे थे साइबर ठगी का नेटवर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग के निर्देशन में थाना सुपेला एवं एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित कर तकनीकी जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी संगठित तरीके से फर्जी बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते थे और बाद में नकद निकासी कर लेते थे।
आरोपी व्हाट्सएप एवं जंगी ऐप के जरिए संपर्क में रहते थे तथा “टोकन सिस्टम” के माध्यम से रकम का लेनदेन करते थे। जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी रायपुर के राठौर चौक स्थित तनिष्क होटल में ठहरे हुए हैं। हालांकि मुखबिर सूचना मिलने के बाद आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदलने लगे और गिरफ्तारी से बचने के लिए रायपुर में किराए के मकानों की तलाश कर रहे थे।
घेराबंदी कर पुलिस ने दबोचे आरोपी
पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी, संदिग्ध बैंक खातों के विश्लेषण एवं मुखबिर सूचना के आधार पर रायपुर में घेराबंदी की। इसी दौरान आरोपी पंकज शर्मा सहित कुछ आरोपियों को जय स्तंभ चौक के पास संदिग्ध अवस्था में पकड़ा गया, जबकि अन्य आरोपी बूढ़ा तालाब क्षेत्र में किराए का मकान तलाशते हुए गिरफ्तार किए गए।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे राजस्थान से अलग-अलग शहरों में आकर होटल और किराए के मकानों में रुकते थे तथा पहचान छिपाकर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे। आरोपी पंकज शर्मा ने बताया कि राजस्थान के लोगों के आधार कार्ड में स्थानीय पता अपडेट कराकर रायपुर में बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी की रकम के लेनदेन और निकासी के लिए किया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की 20 लाख रुपये की राशि को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर छिपाने का प्रयास किया गया था, लेकिन दुर्ग पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी विश्लेषण के चलते गिरोह के सदस्यों को कम समय में गिरफ्तार कर लिया गया।
जब्त सामग्री
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 20 हजार रुपये नगद, 6 मोबाइल फोन, 10 डेबिट कार्ड, 4 पैन कार्ड, 1 आधार कार्ड, 1 वोटर आईडी कार्ड, 1 ड्राइविंग लाइसेंस, 4 चेकबुक, 1 पासबुक, 4 आधार कार्ड एक्नॉलेजमेंट, 3 सिम कार्ड, 12 डिपॉजिट स्लिप, 12 फोटो एवं एक कॉपी जब्त की है।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने मामले में राजस्थान निवासी छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुरली जनागल, गोपाल सोनी, मोती सिंह, मोतीलाल शर्मा, बनवारी शर्मा और पंकज शर्मा शामिल हैं। सभी आरोपी राजस्थान के बीकानेर एवं जोधपुर जिले के निवासी हैं।




