आधुनिकता में भी टीकी हुई है यादवी लोक संस्कृति

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भिलाई, विविधता से भरे भारत देश सहित छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को समृद्ध करने में विभिन्न जाति समुदायों का अपना विशिष्ट और सामुदायिक सहयोग है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों में बहुतायत से निवास करने वाले राउत, यादव समुदाय का भी अपना अमूल्य योगदान है।

अपने को द्वापर युग के श्रीकृष्ण के वंशज बताने वाले, गौ चारण कर अपना जीवन यापन करने तथा निरंतर राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ने की ओर उन्मुख होने वाले राउत समुदाय की अपनी लोक संस्कृति यथावत बची हुई है। साजा विकास खंड के ग्राम नौकेशा में स्वर्गीय सुंदर यादव के दशगात्र के दिन राउत समुदाय द्वारा सृजित, निरंतर पल्लवित और समृद्ध की गई विशिष्ट लोक गाथा बॉंस गीत की परंपरा को बरकरार रखते हुए परिवार के आमंत्रण पर बाबा रुखक्कड़ नाथ बॉंस लोक गाथा दल नारधा के कलाकारों जन्त राम यादव, भगवानी यादव और पूनाराम यादव ने लगभग दो घंटे की अपनी गाथा प्रस्तुति में उज्जैन के महाराजा भरथरी के जीवन चरित्र को दर्शक-श्रोताओं के मध्य मौलिकता के साथ प्रस्तुत किया।

इस मौके पर राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली से राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति योजना चयनित व जूनियर फैलोशिप प्राप्त भरथरी गायिका वंदना वर्मा व जनजाति शोधार्थी एवं लोक संस्कृति कर्मी राम कुमार वर्मा विशेष रुप से उपस्थित होकर भरथरी गाथा की पंक्तियों को लिपिबद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। बढ़ती आधुनिकता के दौर में छत्तीसगढ़ के यादव समुदाय द्वारा अपने समाज की लोक संस्कृति को जन्म से लेकर मृत्यु तक संस्कारगत कार्यों के अवसर पर विशेष रुप से प्रदर्शित करने का अनूठा और सामयिक प्रयास अन्य समुदायों के लिए प्रेरणास्पद है। इस दरमियान यादव समाज के वरिष्ठ जनों, युवा जनों एवं महिलाओं की काफी संख्या में उपस्थिति रही।

Link : https://shricgnewscreator.com/yadvi-folk-culture-endures-even-amidst-modernity/

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