ऑपरेशन विश्वास के तहत रिसाली के स्कूल में 600 विद्यार्थियों को यातायात का पाठ

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यातायात पुलिस की दो टूक—बिना लाइसेंस और बिना हेलमेट आने वाले विद्यार्थियों को स्कूल में प्रवेश न दें, अभिभावकों की बैठक बुलाकर करें जागरूक

दुर्ग, सड़क सुरक्षा और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस दुर्ग द्वारा संचालित “ऑपरेशन विश्वास” के तहत लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को रिसाली स्थित मैत्री विद्या निकेतन स्कूल में विशेष यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 600 छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में यातायात जोन प्रभारी सिविक सेंटर निरीक्षक पी.डी. चंद्रा एवं उनकी टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण किए बिना और वैध ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार का वाहन चलाना कानूनन अपराध है। ऐसा करने से न केवल स्वयं का जीवन खतरे में पड़ता है, बल्कि अन्य लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।

विद्यार्थियों को हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने तथा यातायात संकेतों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।

यातायात पुलिस ने बताया कि नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में वाहन चलाने वाले नाबालिगों के साथ-साथ उन्हें वाहन उपलब्ध कराने वाले अभिभावकों के विरुद्ध भी मोटरयान अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। पुलिस ने कहा कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस और बिना हेलमेट दोपहिया वाहन से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाए। इसके अलावा ऐसे विद्यार्थियों के अभिभावकों की बैठक आयोजित कर यातायात पुलिस को सूचना देने का आग्रह किया गया, ताकि अभिभावकों को भी यातायात नियमों और उनकी कानूनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा सके।

यातायात पुलिस दुर्ग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने के लिए वाहन उपलब्ध न कराएं और उन्हें बचपन से ही यातायात नियमों का पालन करने की सीख दें। पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है और सभी के सहयोग से ही सुरक्षित एवं अनुशासित यातायात व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।

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