महापरिनिर्वाण दिवस पर बुद्ध भूमि में दी श्रद्धांजलि
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भिलाई। बुद्ध भूमि कोसा नगर में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पमाला अर्पण कर तथा मोमबत्ती की रोशनी के बीच श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यहां स्थापित शिक्षा महर्षि महात्मा ज्योतिबा फुले की प्रतिमा पर बौद्ध कल्याण समिति के अध्यक्ष नरेंद्र शेन्डे ने सभी सदस्यों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। सह सचिव गौतम डोंगरे ने ज्योतिबा फुले के समाज सुधार ,नारी शिक्षा और छुआछूत के प्रति रोकथाम के कार्यों के उल्लेख किए। उपाध्यक्ष माया सुखदेवे ने कहा कि महान क्रांति सूर्य ज्योतिबा फुले को बाबा साहब अम्बेडकर अपना गुरु मानते थे।ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था तथा उनकी मृत्यु 28 नवंबर 1890 को पुणे में हुआ था। घनश्याम गणवीर ने कहा कि उन्हें महात्मा की उपाधि समाज सुधारक विट्ठल राव कृष्ण वाडेकर ने दी थी। ज्योतिबा फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की जिसका उद्देश्य जातीय सामान्य को बढ़ावा देना था उन्होंने अपनी पुस्तक ‘गुलामगिरी’ में जाति व्यवस्था तथा सामाजिक सुधार के लिए अपने विचारों को व्यक्त किया। जयेंद्र चिंचखेड़े ने कहा कि ज्योतिबा ने विधवाओं की दयनीय स्थिति को समझा और युवा विधवाओं के लिए एक आश्रम खोला। सचिव ज्ञानचंद टेंभुर्णिकर ने बताया कि उन्होंने 1848 में अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल खुला। सभी लोगों ने उनके कार्यों का स्मरण कर उनकी पुण्यतिथि पर उनके बताएं मार्गों पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर बालेश्वर चौरे, रविंद्र रामटेके, डॉ. उदय धाबर्डे, भीमराव शाहने, भिमटे, अलका शेन्डे सहित अन्य गण मान्य नागरिक उपस्थित थे।