भिलाई-3 में भागवत कथा की रसधार, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहुंचे
ध्रुव की अटूट भक्ति और भरत चरित्र से जीवन में वैराग्य का संदेश
भिलाई, श्री जय जगन्नाथ सेवा समिति एवं नगरवासियों के तत्वावधान में मंगल भवन के सामने आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथावाचक पंडित युवराज पांडेय ने ध्रुव चरित्र, भरत चरित्र और परीक्षित जन्म के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने इन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य, धैर्य और अच्छे संस्कारों का महत्व समझाया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि सच्चे ज्ञानी की पहचान उसका ज्ञान नहीं, बल्कि उसकी विनम्रता और व्यवहार होता है।

पंडित युवराज पांडेय ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि बालक ध्रुव को पारिवारिक उपेक्षा और अपमान का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निराश होकर हार मानने के बजाय दृढ़ संकल्प के साथ भगवान की आराधना का मार्ग चुना। कठिन तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें दर्शन दिए। यह प्रसंग संदेश देता है कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मन में सच्ची श्रद्धा, धैर्य और दृढ़ संकल्प हो तो लक्ष्य की प्राप्ति संभव है।
इसके बाद उन्होंने भरत चरित्र के माध्यम से वैराग्य, साधना और सांसारिक मोह से ऊपर उठकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा दी। वहीं परीक्षित जन्म की कथा सुनाते हुए भगवान की कृपा, भक्तों की रक्षा और धर्म की महत्ता का वर्णन किया। कथा के इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

ज्ञान बढ़ने के साथ व्यवहार में आनी चाहिए विनम्रता
प्रवचन के दौरान पंडित युवराज पांडेय ने कहा कि ज्ञानी व्यक्ति सदैव विनम्र होता है। व्यक्ति के पास जितना अधिक ज्ञान होता है, उसके व्यवहार में उतनी ही सहजता और नम्रता दिखाई देनी चाहिए। ज्ञान बढ़ने के साथ अहंकार नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति सम्मान और सद्भाव का भाव विकसित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विनम्रता ही वास्तविक ज्ञान की पहचान है।
उन्होंने खानपान और संस्कारों के संबंध पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसा अन्न होगा, वैसा ही मन बनेगा। इसलिए भोजन हमेशा सोच-समझकर और उचित स्थान पर करना चाहिए। भोजन बनाने और परोसने वाले व्यक्ति के मन में भी अच्छे विचार और सकारात्मक भाव होने चाहिए, क्योंकि भोजन का प्रभाव केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों, मन और संस्कारों पर भी पड़ता है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया कथा श्रवण
कथा आयोजन के दौरान शुक्रवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पहुंचे। उन्होंने व्यासपीठ पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और कथावाचक पंडित युवराज पांडेय से आशीर्वाद लेकर कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आगामी दिनों में होंगे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और विवाह प्रसंग
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का संगीतमय वर्णन किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 31 अक्टूबर को अजामिल उपाख्यान और भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाई जाएगी। एक नवंबर को समुद्र मंथन, सूर्यवंश और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग होगा। दो नवंबर को बालकृष्ण की लीलाओं और दही लूट का आयोजन किया जाएगा।

इसी क्रम में तीन नवंबर को श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह एवं महारास का वर्णन होगा। चार नवंबर को चढ़ौत्री, तुलसी वर्षा, गीता दान और हवन-पूजन के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का विधिवत समापन होगा।
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