दुर्ग सांसद विजय बघेल ने बच्चों को दिया आशीर्वाद, कहा अधिकारों से अधिक कर्तव्यों के पालन में छिपा है समस्याओं का समाधान
भिलाई, स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज की पावन प्रेरणा और दिव्य आशीष से गीता परिवार, छत्तीसगढ़ द्वारा भिलाईनगर में आयोजित छह दिवसीय ‘बाल संस्कार सिंचन शिविर’ का भव्य समापन शनिवार, 30 मई को प्रातः 7:00 बजे “संस्कृति गौरव एवं आशीर्वाद समारोह” के रूप में संपन्न हुआ। इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल उपस्थित रहे और उन्होंने दीप प्रज्वलन कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। उनके साथ ही समाज के प्रबुद्धजन, माहेश्वरी समाज तथा वनवासी कल्याण परिषद के अनेक गणमान्य पदाधिकारी भी इस वैचारिक और सांस्कृतिक उत्सव के साक्षी बने।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सांसद विजय बघेल ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आजकल के समय में ऐसे संस्कार शिविरों की अत्यंत आवश्यकता है। आज समाज और प्रत्येक व्यक्ति अपनी छोटी-छोटी समस्याओं एवं उलझनों के बोझ से दबा हुआ है और इन समस्याओं का समाधान बाहर खोज रहा है। किंतु अपने अधिकारों की बात करते समय व्यक्ति यह भूल जाता है कि उसके स्वयं के प्रति, समाज के प्रति और परिवार के प्रति कुछ निजी एवं मौलिक कर्तव्य भी हैं। यदि हम उन मौलिक कर्तव्यों का समुचित रूप से पालन करते हुए चलें और अपनी जिम्मेदारियों को समझें, तो संसार की सारी समस्याओं का समाधान स्वतः हो जाएगा। यही हमारी श्रीमद्भगवद्गीता भी कहती है कि हमें समस्यामूलक नहीं, बल्कि समाधानमूलक जीवन जीना चाहिए। जीवन तो समस्याओं से भरा ही हुआ है, यह जीवन किसी महाभारत के युद्ध से कम नहीं है, किंतु हमें फल की चिंता किए बिना केवल अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना है।
जब पूरा दुर्ग-भिलाई क्षेत्र 45-46° की भीषण गर्मी और तपन से दहक रहा था, तब लगभग 90 से अधिक बच्चों ने इस शिविर में अपने धैर्य, अटूट लगन और कड़े परिश्रम के बल पर जीवन को एक नवीन सकारात्मक दिशा दी। 25 मई से निरंतर चल रहे इस पूर्ण-दिवसीय निःशुल्क शिविर में बच्चों ने प्राचीन भारतीय विधाओं के साथ-साथ आधुनिक जीवन मूल्यों को खेल-खेल में आत्मसात किया।

यह शिविर बच्चों के बहुमुखी विकास हेतु विशेष रूप से याद किया जाएगा। शिविर में पुणे से पधारे कुशल प्रशिक्षक कुमारी गौरी एवं श्रीधर द्वारा बच्चों को अत्यंत उत्तम, अनूठा और स्मरणीय प्रशिक्षण दिया गया, जिसने उनके अंतःकरण को संस्कारित किया। छह दिनों के इस गहन प्रशिक्षण में न केवल बच्चों की आंतरिक प्रतिभाओं, आत्मविश्वास, स्मरण शक्ति, एकाग्रता, अनुशासन, मेधा एवं त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को निखारा गया, बल्कि उनके शारीरिक संवर्धन तथा संस्कृति एवं कला के प्रति भी मन में जागरूकता का गहरा भाव उत्पन्न किया गया। इसके साथ ही खेल, कथा-कहानियों और जीवन प्रसंगों के माध्यम से उनके भीतर धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों के संस्कारों का सुंदर सिंचन किया गया।
समापन समारोह के मुख्य आकर्षण:
शनिवार सुबह आयोजित इस भव्य समापन समारोह में शिविरार्थी बच्चों ने अपने छह दिनों के कड़े अभ्यास और सीखे हुए संस्कारों का सजीव प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में:
- गोपुरम निर्माण: सामूहिकता और एकाग्रता का अनूठा प्रतीक।
- लाठी-काठी चालन: आत्मरक्षा व शारीरिक शौर्य का साहसिक प्रदर्शन।
- संगीतमय योगासन: मानसिक व शारीरिक संतुलन का सुंदर समन्वय। इसके अतिरिक्त बच्चों द्वारा अत्यंत मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।
भावुक कर देने वाला रहा मातृ-पितृ पूजन का क्षण:
शिविर के पांचवें दिन आयोजित ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ का दृश्य अत्यंत भावुक और अश्रुपूर्ण रहा। जब नन्हें-मुन्ने बच्चों ने पूरी श्रद्धा के साथ अपने-अपने माता-पिता की आरती उतारी, कुमकुम तिलक किया और उनके चरण धोकर आदर एवं सम्मान दिया, तो उपस्थित सभी अभिभावकों की आंखें छलक आईं। बच्चों के भीतर अपनी जड़ों और माता-पिता के प्रति कृतज्ञता का यह भाव जगाना ही इस शिविर की सबसे बड़ी सफलता सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम में महिला माहेश्वरी समाज ने उपस्थित होकर बच्चों को आम एवं शीतल पेय वितरित किया।
गीता परिवार का संक्षिप्त परिचय एवं ऐतिहासिक 40वां वर्ष:
विदित हो कि गीता परिवार विगत 39 वर्षों से बाल संस्कार, गीता ज्ञान और वेदोत्थान के पुनीत कार्य में निरंतर संलग्न है। यह संपूर्ण कार्य ईश्वर की अनन्य भक्ति और भारत मां की सच्ची सेवा के रूप में पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के कुशल मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। वर्तमान में गीता परिवार अपने स्थापना के 40वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जिसे पूरे भारत वर्ष में विशेष संकल्पों के साथ मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक वर्ष के माध्यम से देश भर में 40,000 समर्पित कार्यकर्ताओं का निर्माण करने तथा 40 लाख लोगों तक गीता के दिव्य संदेश को पहुंचाने का भव्य लक्ष्य रखा गया है। संस्था द्वारा जन-जन को गीता से जोड़ने के लिए ‘लर्न गीता’ (LearnGeeta) के माध्यम से ऑनलाइन निःशुल्क कक्षाओं का भी देश-विदेश में बेहद सफल संचालन किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर गीता परिवार का यह आयोजन एक युगांतरकारी कदम सिद्ध हुआ है। प्रमिला ताई माहेश्वरी (मध्यांचल प्रमुख, गीता परिवार) के वात्सल्यमयी मार्गदर्शन, स्नेह एवं पावन प्रेरणा से यह शिविर सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। इसके साथ ही, गीत गोविन्द साहू (अध्यक्ष, गीता परिवार छत्तीसगढ़) के ओजस्वी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की इस पावन धरा पर संस्कारों के एक नए युग का आरम्भ हुआ है, जो आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इस भगीरथ प्रयास को सफल बनाने में मां शारदा पब्लिक स्कूल (सेक्टर-9) के प्रशासन का विशेष और अत्यंत सराहनीय योगदान रहा है। स्कूल प्रशासन ने उदारतापूर्वक अपने प्रांगण के द्वार इस पुनीत कार्य के लिए खोल दिए और पूरे समय हर आवश्यक व्यवस्था में पूर्ण सहभागिता व सहयोग सुनिश्चित किया।
शिविर के कुशल संचालन में गीता परिवार दुर्ग-भिलाई इकाई की अध्यक्षा भूमिजा बेंडाले, सचिव आशुतोष अग्रवाल, कोषाध्यक्ष माधुरी पाटिल तथा प्रांतीय सचिव इंद्रसेन अग्रवाल सहित स्थानीय कार्यकर्ताओं की टोली ने दिन-रात एक कर दिया। विशेष बात यह रही कि भिलाई के इस शिविर को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राजधानी रायपुर से भी अनेक वरिष्ठ साधकों ने अपनी गरिमामयी सेवाएं दीं। रायपुर के इन साधकों ने समय-समय पर भिलाई शिविर में उपस्थित होकर विभिन्न सत्रों को व्यवस्थित करने में अपना बहुमूल्य और प्रेरक सहयोग प्रदान किया।
जागरूक अभिभावकों के विश्वास और कार्यकर्ताओं के अनथक परिश्रम से संपन्न हुए इस अनुष्ठान ने बिलासपुर के बाद अब दुर्ग-भिलाई में भी भावी सांस्कृतिक व नैतिक चेतना के कार्यों के लिए एक नया द्वार खोल दिया है। समापन के इस पावन अवसर पर भिलाई के अनेक प्रबुद्ध नागरिकों, राष्ट्रप्रेमियों और आदरणीय अभिभावकों ने उपस्थित होकर बच्चों की इस अद्भुत प्रतिभा की सराहना की और उन्हें अपना स्नेहाशीष प्रदान किया।




