रायपुर मंडल में 23 और 24 सितंबर को चला विशेष जागरूकता अभियान, ‘अब दो नहीं, चार’ के जरिए कचरा पृथक्करण पर जोर; होम कम्पोस्टिंग और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली को लेकर किया जागरूक
रायपुर, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाए जा रहे ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत 23 और 24 सितंबर को जनभागीदारी आधारित विभिन्न जागरूकता एवं सहभागिता गतिविधियां आयोजित की गईं। अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे जन आंदोलन का स्वरूप देना और आमजन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
इस दौरान रेलवे कॉलोनियों, स्टेशनों, विद्यालयों, अस्पतालों और कार्यशालाओं में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, होम कम्पोस्टिंग तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। रेलवे कर्मचारियों, उनके परिवारों, यात्रियों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय को स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
घर-घर पहुंचकर कचरा पृथक्करण की जानकारी
अभियान के अंतर्गत नामित अधिकारियों-कर्मचारियों और सामुदायिक प्रतिनिधियों ने डब्ल्यूआरएस रेलवे कॉलोनी सहित अन्य रेलवे कॉलोनियों में घर-घर जाकर लोगों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रावधानों और कचरे के स्रोत पर चार-तरफा पृथक्करण की जानकारी दी।
अभियान में ‘अब दो नहीं, चार’ संदेश के माध्यम से घरों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित श्रेणियों में अलग-अलग रखने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। कचरे को स्रोत पर ही अलग करने से उसके उचित निस्तारण, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
घर पर जैविक कचरे से खाद बनाने की अपील
रेलवे कॉलोनियों में होम कम्पोस्टिंग को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। लोगों को घर में निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग कर खाद तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों और कार्यशालाओं में उपलब्ध बायो-कम्पोस्ट सुविधाओं के उपयोग और विस्तार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
रेलवे का उद्देश्य जैविक कचरे को स्थानीय स्तर पर उपयोगी खाद में परिवर्तित कर कचरे की मात्रा कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प अपनाने पर जोर
अभियान के दौरान ‘सिंगल यूज प्लास्टिक को कहें ना’ का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया। रेलवे स्टेशनों के वेंडिंग क्षेत्रों में कपड़े के थैलों के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया। यात्रियों और रेल कर्मचारियों को प्लास्टिक के स्थान पर पुन: उपयोग योग्य कपड़े के थैले अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
रेलवे स्टेशनों पर स्थापित प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों के रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया गया। इन मशीनों के माध्यम से प्लास्टिक की बोतलों को क्रश कर उनके पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
‘नेकी की दीवार’ के जरिए जरूरतमंदों तक पहुंचेंगी उपयोगी वस्तुएं
अभियान के तहत दुर्ग स्टेशन सहित अन्य रेलवे स्टेशनों और रेलवे कॉलोनियों में ‘नेकी की दीवार’ के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता के लिए पहल की गई। लोगों को ऐसे कपड़े, किताबें, घरेलू सामग्री और अन्य उपयोगी वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया, जो उनके स्वयं के उपयोग में नहीं हैं, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति के काम आ सकती हैं।
इसके साथ ही आरआरआर केंद्रों को भी उपयोगी वस्तुओं के पुन: उपयोग और जरूरतमंदों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वच्छता को नियमित व्यवहार से जोड़ने पर जोर
रायपुर मंडल द्वारा स्वच्छता ही सेवा अभियान को केवल निर्धारित अवधि तक चलने वाली गतिविधि के रूप में न लेते हुए इसे निरंतर जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन का माध्यम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। रेलवे परिसर और कॉलोनियों को स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए कर्मचारियों, उनके परिवारों, यात्रियों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि स्वच्छता केवल रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता संबंधी आदतों में स्थायी बदलाव लाकर स्वच्छ और बेहतर रेलवे परिसर के निर्माण की दिशा में प्रयास जारी हैं।
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