डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी कॉल और संदिग्ध लिंक से बचाव के बताए उपाय, आम लोगों तक जागरूकता पहुंचाने के लिए किया प्रेरित
भिलाई, साइबर अपराधों से बचाव और आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग और दुर्ग पुलिस के साइबर सेल के संयुक्त तत्वावधान में पैरा लीगल वालंटियर्स (PLV) के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सेक्टर-6 स्थित कंट्रोल रूम में हुए कार्यक्रम में PLV को साइबर अपराधों की पहचान, ऑनलाइन ठगी के तरीकों और इससे बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम साइबर जागरूकता अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक दुर्ग के निर्देशन में आयोजित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में जिले के समस्त पैरा लीगल वालंटियर्स ने हिस्सा लिया।

डिजिटल अरेस्ट और ओटीपी फ्रॉड से बचने के बताए तरीके
प्रशिक्षण के दौरान निरीक्षक पुष्पेंद्र भट्ट ने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली और ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को झांसे में लेकर बैंकिंग और निजी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में सतर्कता बरतना जरूरी है।
सब इंस्पेक्टर डॉ. संकल्प राय, नोडल अधिकारी साइबर जागरूकता ने डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और ऑनलाइन ठगी से बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने PLV को बताया कि साइबर अपराध के नए तरीकों को लेकर आम लोगों को लगातार जागरूक करने की जरूरत है।
1930 पर तत्काल शिकायत की समझाई प्रक्रिया
आरक्षक कमेश्वर देशमुख ने GRM एवं MRM पोर्टल के संबंध में जानकारी दी। साथ ही साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की प्रक्रिया समझाई गई। National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में PLV को इस बात के लिए प्रेरित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में आम नागरिकों तक साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां पहुंचाएं और लोगों को ऑनलाइन ठगी के प्रति सतर्क करें।

दुर्ग पुलिस ने की सतर्क रहने की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अज्ञात एप्लीकेशन डाउनलोड करने से भी बचें। पुलिस ने कहा कि साइबर ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल 1930 पर शिकायत करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
Link : https://shricgnewscreator.com/plvs-trained-on-cybercrime-prevention-informed-about-lodging-immediate-complaints-on-1930/













