कल्याण महाविद्यालय में 500 से अधिक विद्यार्थियों को साइबर ठगी से बचाव की दी जानकारी

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एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा- ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें, संदिग्ध लिंक व क्यूआर कोड से रहें सावधान

भिलाई, छत्तीसगढ़ पुलिस के 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए जा रहे साइबर जागरूकता अभियान के तहत गुरुवार को कल्याण महाविद्यालय, भिलाई में साइबर अपराध एवं डिजिटल सुरक्षा विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। दीक्षा आरंभ कार्यक्रम के अंतर्गत हुए इस आयोजन में महाविद्यालय के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल और मैसेज, संदिग्ध लिंक, सोशल मीडिया से जुड़े अपराध तथा डिजिटल लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय शर्मा, विशिष्ट अतिथि डॉ. अनुपमा अस्थाना, प्रभारी छात्रसंघ डॉ. ईश्वर सिंह बरगाह सहित शिक्षकगण और विद्यार्थी मौजूद रहे।

साइबर अपराध के बदलते तरीकों से कराया अवगत

साइबर क्राइम के नोडल अधिकारी डॉ. संकल्प राय ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को विश्वास में लेकर, भय दिखाकर या लालच देकर उनकी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। फर्जी बैंक अधिकारी, केवाइसी अपडेट, इनाम, नौकरी, निवेश, लोन और अन्य बहानों से ठगी के मामले सामने आते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी, पासवर्ड या बैंक खाते से संबंधित जानकारी नहीं देनी चाहिए। सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की भी सलाह दी गई।

संदिग्ध लिंक और क्यूआर कोड से रहें सावधान

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संदिग्ध लिंक, अनजान मैसेज और क्यूआर कोड के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई। बताया गया कि किसी व्यक्ति या संस्था के नाम से आए संदेश अथवा लिंक पर बिना सत्यापन के क्लिक करना नुकसानदायक हो सकता है। इसी तरह किसी को पैसा भेजने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले पूरी जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

डिजिटल लेन-देन करते समय जल्दबाजी नहीं करने और किसी भी प्रकार की शंका होने पर संबंधित बैंक अथवा संस्था के अधिकृत माध्यम से जानकारी की पुष्टि करने की बात कही गई।

एसएसपी ने विद्यार्थियों से परिवार को भी जागरूक करने कहा

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपनी बैंकिंग एवं व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। उन्होंने कहा कि ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी बैंक या कोई अधिकृत संस्था फोन पर नहीं मांगती। ऐसे कॉल आने पर सतर्क रहें और बिना सत्यापन के कोई जानकारी या राशि साझा न करें।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से बचाव में जागरूकता और सतर्कता सबसे प्रभावी उपाय हैं।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत

पुलिस ने विद्यार्थियों को बताया कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके साथ ही नजदीकी पुलिस थाना या साइबर सेल को भी सूचना देने की सलाह दी गई।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी की जानकारी जितनी जल्दी दी जाती है, उतनी ही जल्दी ठगी की रकम को रोकने और आगे होने वाले नुकसान को सीमित करने की संभावना रहती है।

दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सतर्क रहें और किसी भी अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, क्यूआर कोड अथवा फर्जी ऑनलाइन ऑफर के झांसे में न आएं। साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पुलिस की ओर से ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं।

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