सेठ रतनचंद सुराना विधि महाविद्यालय में वैकल्पिक विवाद समाधान सेमिनार का द्वितीय दिवस संपन्न

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लोक अदालत, मध्यस्थता और ऑनलाइन विवाद निपटान पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, विद्यार्थियों को दी न्याय प्रणाली की व्यावहारिक समझ

दुर्ग, सेठ रतनचंद सुराना विधि महाविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आयोजित वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) विषयक सेमिनार का द्वितीय दिवस उत्साहपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव, विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली के प्रमुख, सहायक अधिवक्ता तथा मध्यस्थ अधिवक्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सेमिनार के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को संविधान एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की अवधारणा पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एडीआर क्या है, किन परिस्थितियों में इसका उपयोग किया जाता है, इसकी आवश्यकता क्यों है तथा यह समाज और न्याय प्रणाली को किस प्रकार सुदृढ़ बनाता है। लोक अदालत एवं मध्यस्थता की प्रक्रिया को सरल भाषा में व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।

विशेषज्ञों ने न्यायालयों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए मध्यस्थता के विभिन्न प्रकारों एवं उनकी प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्तमान समय में एडीआर की बढ़ती प्रासंगिकता और इसकी उपयोगिता को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव ने ऑनलाइन विवाद निपटान की अवधारणा से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया। उन्होंने इसके प्रारंभ, उपयोग के क्षेत्रों और लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी भी साझा की गई।

मध्यस्थता प्रक्रिया को रोचक बनाने के लिए विशेषज्ञों ने फिल्मों के पात्रों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विवाद समाधान की भूमिका को सहज ढंग से समझाया तथा ‘मध्यस्थता 2.0’ की अवधारणा पर विशेष चर्चा की।

इसके अलावा आधुनिक तकनीकी साधनों के प्रभावी उपयोग पर मार्गदर्शन देते हुए विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से प्राप्त जानकारी के सत्यापन की आवश्यकता पर बल दिया और इससे संबंधित उदाहरण भी साझा किया।

कार्यक्रम के दौरान एक चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें केंद्रीय जेल के बंदियों, पैरालीगल स्वयंसेवकों एवं विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली के कर्मचारियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी को विद्यार्थियों एवं अतिथियों ने काफी सराहा।

समापन अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव ने महाविद्यालय के प्राचार्य को “राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 2.0” विषयक विशेष पुस्तक “आईसागर – दुर्ग जिले का मध्यस्थता रणनीति मॉडल” भेंट की। साथ ही इसकी सॉफ्ट प्रति विद्यार्थियों को व्हाट्सएप समूह के माध्यम से उपलब्ध कराई गई।

सेमिनार में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और विभिन्न विधिक विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं संतोषजनक उत्तर दिया। यह विधिक साक्षरता कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक साबित हुआ।

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