रोज कम से कम 10 से 15 मिनट अपने बुजुर्गों के साथ बैठने का संकल्प लेना जरूरी: चौधरी
हम अपने बुजुर्गों को बदलते दौर के अनुरूप अपडेट रखें: मौर्य
अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दुर्व्यवहार निवारण दिवस पर हुआ जन जागरण समारोह का आयोजन
भिलाई, वरिष्ठ नागरिक महासंघ (भिलाई) की प्रबंधकारिणी समिति द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दुर्व्यवहार निवारण दिवस के अवसर पर 15 जून को जन जागरण समारोह का आयोजन सियान सदन, वार्ड- 15, शांति नगर, भिलाई में किया गया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के तौर पर अखिल भारतीय पंवार क्षत्रिय समाज भिलाई के अध्यक्ष नंदलाल चौधरी और सर्टिफाइड पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन उपस्थित थे। वहीं आयोजन की अध्यक्षता वार्ड-15 के पार्षद संतोष मौर्य ने की। आरंभ में अध्यक्ष गजानंद साहू महासचिव महेन्द्र कुमार सोनवानी और कोषाध्यक्ष राजेश कुमार पदमवार ने अतिथियों का स्वागत किया। महासचिव सोनवानी ने अपने स्वागत भाषण में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

अपने उद्बोधन में इस अवसर पर अखिल भारतीय पंवार क्षत्रिय समाज भिलाई के अध्यक्ष नंदलाल चौधरी ने कहा कि आज हम सब मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया में खो गए हैं। हम रील्स देखने में घंटों बिता देते हैं, लेकिन घर के बुजुर्गों के पास 5 मिनट बैठने का समय हमारे पास नहीं होता। आज के इस डिजिटल दौर में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार का रूप भी बदल गया है।
उन्हें डिजिटल दुनिया से अलग-थलग छोड़ देना भी एक तरह का दुर्व्यवहार है। आजकल ठग हमारे भोले-भाले बुजुर्गों को फोन पर ओटीपी या बैंक के नाम पर ठग लेते हैं। यह भी उनके साथ एक बड़ा अपराध है। उन्होंने कहा कि आज से हम यह संकल्प लें कि रोज कम से कम 10 से 15 मिनट अपने घर के बुजुर्गों के साथ बैठेंगे। उनसे बातें करेंगे, उनके पुराने किस्से सुनेंगे। चौधरी ने कहा कि आपकी थोड़ी सी बातचीत इन बुजुर्गों का अकेलापन दूर कर देगी।
आयोजन में सर्टिफाइड पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने कहा कि हमारे बुजुर्ग सिर्फ उम्र में बड़े नहीं , हमारे परिवार की नींव भी हैं। वे तजुर्बे का वो समंदर हैं, जिससे हमारा आज का जीवन संवरा है। लेकिन आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि बदलते वक्त में हमारे बुजुर्ग अकेले पड़ रहे हैं। कई जगहों पर उनके साथ दुर्व्यवहार, यानी गलत व्यवहार की खबरें आती हैं।

जैन ने कहा कि जिस तरह सांस लेना और भोजन करना स्वाभाविक प्रक्रिया है, ठीक उसी तरह नए विचार आना भी हमारे जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक है। आज बुजुर्गों के लिए सबसे उत्तम अवस्था वही है कि हम विचारों को लेकर जूझते न रहें बल्कि नए विचारों को अपने मन मस्तिष्क में आने दें। हमें बीती बातों से उबरना होगा और शेष जीवन हमें धैर्यपूर्वक नए विचारों के साथ जीना होगा।
श्री जैन ने कहा कि ज्यादातर वृद्धजनों की शिकायतें अपने बच्चों को लेकर होती है। इसमें हमें ध्यान देना होगा कि हमने अपने बच्चों को कैसी परवरिश दी है, वही हमे वापस मिल रहा है। इसलिए दोषारोपण करने के बजाए सकारात्मक रहना आज की पहली जरूरत है।







