64,840 कार्यक्रमों के जरिए 32.46 लाख लोगों तक पहुंचाया साइबर सुरक्षा का संदेश, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा ने किया सम्मानित
दुर्ग, साइबर अपराधों की रोकथाम और आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी के प्रति जागरूक करने के लिए दुर्ग पुलिस द्वारा चलाए गए साइबर जागृति अभियान को छत्तीसगढ़ राज्य में दूसरा स्थान मिला है। 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित इस अभियान के दौरान जिले में कुल 64,840 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके माध्यम से 32 लाख 46 हजार 1 लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इस उपलब्धि के लिए दुर्ग पुलिस को राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित किया गया।
रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में 9 अक्टूबर को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति में दुर्ग पुलिस को पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार भी उपस्थित रहे। दुर्ग पुलिस की ओर से अभियान के नोडल अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मणिशंकर चन्द्रा ने पुरस्कार ग्रहण किया।

स्कूल-कॉलेज से गांवों तक चलाया जागरूकता अभियान
दुर्ग पुलिस ने साइबर अपराधों से बचाव का संदेश आम लोगों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर जागरूकता गतिविधियां संचालित कीं। स्कूलों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की जानकारी दी गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में चौपालों के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराधों के नए तरीकों से अवगत कराया गया। इसके साथ ही नुक्कड़ नाटकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों के जरिए भी लोगों को जागरूक किया गया। अभियान का उद्देश्य नागरिकों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने के लिए प्रेरित करना और साइबर ठगी की घटनाओं को रोकने में जनभागीदारी बढ़ाना रहा।
ऑनलाइन ठगी के तरीकों से किया जागरूक
अभियान के दौरान लोगों को फर्जी फोन कॉल, संदिग्ध लिंक, डिजिटल भुगतान में धोखाधड़ी और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया। नागरिकों को समझाया गया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी मेहनत की कमाई ठग सकते हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम है।
पुलिस ने लोगों को अनजान व्यक्तियों के साथ ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड और बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी। साथ ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने अथवा अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन भुगतान करने से बचने की अपील की गई।

पुलिस और आम नागरिकों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
दुर्ग पुलिस के अनुसार, साइबर जागृति अभियान को सफल बनाने में जिले के विभिन्न थानों के प्रभारियों, पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शैक्षणिक संस्थानों, ग्रामीण क्षेत्रों और सार्वजनिक आयोजनों में समन्वय के साथ कार्यक्रम आयोजित कर साइबर सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया गया। अभियान के नोडल अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मणिशंकर चन्द्रा के समन्वय में जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं।
राज्य स्तर पर दूसरा स्थान हासिल करना दुर्ग पुलिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह अभियान साइबर अपराधों की रोकथाम के साथ आम नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने और पुलिस तथा जनता के बीच सहयोग मजबूत करने की दिशा में किए गए प्रयासों को दर्शाता है।
ठगी होने पर 1930 पर करें संपर्क
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सावधानी बरतें और अपनी बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
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