सुपेला, उतई और भिलाई-3 थाना क्षेत्र के बैंक खातों में ठगी की रकम के लेनदेन का खुलासा, केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से मिली सूचना पर कार्रवाई
भिलाई, साइबर ठगी के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के तीन थाना क्षेत्रों में 362 संदिग्ध म्यूल खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस को केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। जांच में इन बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेनदेन होने का खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार थाना सुपेला, उतई और पुरानी भिलाई क्षेत्र में संचालित विभिन्न बैंकों के खातों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम सीधे इन खातों में जमा की गई थी। इसके बाद रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया, जिसके चलते इन्हें “लेयर-1 म्यूल खाते” की श्रेणी में रखा गया।
थाना सुपेला क्षेत्र स्थित बंधन बैंक के खातों की जांच में साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन पाए गए। इस मामले में 172 खाताधारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
इसी तरह थाना उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई है। जांच में ठगी की रकम प्राप्त कर उसे अन्य खातों में ट्रांसफर किए जाने के तथ्य सामने आए हैं।
वहीं थाना पुरानी भिलाई क्षेत्र अंतर्गत बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खातों की जांच में साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेनदेन का खुलासा हुआ। इस मामले में 160 खाताधारकों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच जारी है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को प्राप्त करने, छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए किया गया। पुलिस का कहना है कि खाताधारकों ने स्वयं अथवा अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध आर्थिक गतिविधियों में किया।
दुर्ग पुलिस के अनुसार समन्वय पोर्टल से प्राप्त शिकायतों, बैंक खातों की जानकारी और साइबर शिकायत पावती के आधार पर कार्रवाई की गई है। पुलिस पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी, मोबाइल नंबर या इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा न करें तथा साइबर ठगी से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।


