रावघाट रेल परियोजना से बस्तर को मिलेगी नई रफ्तार

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रायपुर,  भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की बहुप्रतीक्षित रावघाट रेल परियोजना 20 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई, जब रावघाट रेलखंड पर रेल इंजन का सफल परिचालन किया गया। इस परीक्षण ने स्पष्ट संकेत दिया है कि रावघाट माइंस से सीधे रेल रेक संचालन की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। आगामी जून माह में कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) का निरीक्षण और परियोजना की अंतिम कमीशनिंग प्रस्तावित है। इसके बाद रावघाट से सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र तक लौह अयस्क की नियमित आपूर्ति शुरू होने की संभावना है।

इस उपलब्धि को केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि बस्तर क्षेत्र के विकास में निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय तक दुर्गम जंगलों, पहाड़ी इलाकों और सीमित संसाधनों के कारण विकास से पीछे रहे बस्तर में अब औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलती दिख रही है। इस बदलाव के केंद्र में दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना है, जिसे Steel Authority of India Limited (सेल) और भारतीय रेलवे ने मिलकर एक औद्योगिक आवश्यकता के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास की दीर्घकालिक आधारशिला के रूप में विकसित किया है।
वर्ष 2008 में हुए एमओयू के साथ शुरू हुई यह परियोजना अब एक बड़े सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का प्रतीक बन चुकी है। करीब 95 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन नक्सल प्रभावित और अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरती है, जहां निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती रही। वर्ष 2012 में गृह मंत्रालय के समन्वय से एसएसबी और बीएसएफ की दो-दो बटालियन तैनात की गईं। साथ ही सेल द्वारा 4 अर्ध-स्थायी एवं 21 स्थायी सुरक्षा शिविरों का निर्माण कराया गया, जिस पर 180 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई।

परियोजना का निर्माण कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा भारतीय रेलवे और सेल के वित्तीय सहयोग से किया जा रहा है। कुल अनुमानित लागत लगभग 1854 करोड़ रुपये है, जिसमें से भिलाई इस्पात संयंत्र अब तक लगभग 1720 करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है। इसके अतिरिक्त विद्युतीकरण कार्य पर लगभग 180 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वर्ष 2010 में शुरू हुई इस परियोजना में अप्रैल 2026 तक अधिकांश भौतिक संरचना पूरी हो चुकी है।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2022 में तब पूरा हुआ, जब दल्लीराजहरा से तरोकी तक यात्री ट्रेन सेवा शुरू की गई। इससे बस्तर अंचल के लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़े। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए अब दुर्ग, भिलाई और अन्य बड़े शहरों तक पहुंच अधिक सरल हो गई है।
बीएसपी के अनुसार, अक्टूबर 2026 से रावघाट से सीधे रेल रेक संचालन शुरू होने की संभावना है। प्रारंभिक चरण में प्रतिदिन लगभग चार रेक यानी करीब 15 हजार टन लौह अयस्क का परिवहन संभव होगा। इससे संयंत्र की कच्चे माल की आपूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत और स्थिर होगी। वर्तमान में बीएसपी की दैनिक आवश्यकता लगभग 32 हजार टन है, जिसे भविष्य में उत्पादन विस्तार के साथ और बढ़ाया जाना है।

वर्ष 2025-26 में अंतागढ़ साइडिंग से 1.74 मिलियन टन लौह अयस्क प्राप्त हुआ, जबकि 2026-27 में अंतागढ़ और रावघाट मिलाकर 4 से 5 मिलियन टन अतिरिक्त आपूर्ति का अनुमान है। परियोजना पूर्ण होने पर यह क्षमता 6 से 7 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है।
बीएसपी रावघाट स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप विकसित कर रहा है, जिसमें तीन यात्री प्लेटफार्म और एक अलग गुड्स प्लेटफार्म शामिल है। यह परियोजना न केवल औद्योगिक उत्पादन को गति देगी, बल्कि बस्तर के भीतरी इलाकों में रोजगार, संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि रावघाट रेल परियोजना अब केवल लौह अयस्क परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि बस्तर के समग्र विकास का मजबूत आधार बन चुकी है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती है।

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