छह वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को मृत्युदंड

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पॉक्सो विशेष न्यायालय ने सोमेश यादव को दोषी ठहराया, दो धाराओं में फांसी की सजा और अर्थदंड; वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष

दुर्ग, छह वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के गंभीर मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय, दुर्ग ने आरोपी सोमेश यादव को मृत्युदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने मामले को विरलतम से विरलतम श्रेणी का मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड तथा दोनों धाराओं में पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

मामला थाना मोहन नगर के अपराध क्रमांक 133/2025 से संबंधित है। न्यायालय ने यह फैसला 10 सितंबर 2026 को सुनाया। मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया विधि के अनुसार छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर के समक्ष होगी।

लापता होने की सूचना मिलते ही शुरू हुई तलाश

पुलिस के अनुसार छह अप्रैल 2025 को मोहन नगर थाना क्षेत्र में छह वर्ष तीन माह की बालिका के लापता होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना समय गंवाए बालिका की तलाश शुरू कर दी। पुलिस टीमों को अलग-अलग संभावित स्थानों पर भेजा गया और उपलब्ध तकनीकी तथा मैदानी सूचनाओं के आधार पर पतासाजी की गई।

तलाश के दौरान पुलिस टीम ने बालिका को एक वाहन से बरामद किया। उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पंचनामा, पोस्टमार्टम सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू की।

घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर वहां से उपलब्ध साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से संकलित किया। विवेचना के दौरान मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ ही जैविक, चिकित्सकीय, डीएनए और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच का आधार बनाया गया।

पुलिस ने आरोपी की पहचान कर उसे विधिवत गिरफ्तार किया। आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी और जब्ती की गई। आरोपी के कपड़ों तथा घटनास्थल से मिली सामग्रियों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया।

मृतिका के आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े, स्वाब, बाल, नाखून सहित अन्य संबंधित सामग्री भी विधिवत जब्त की गई। आरोपी और संबंधित व्यक्तियों के डीएनए परीक्षण के लिए नमूने लिए गए।

सीसीटीवी और डीवीआर भी बने जांच का हिस्सा

पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज तथा डीवीआर को भी सुरक्षित कर जब्त किया। जब्त सामग्री को एफएसएल और डीएनए परीक्षण के लिए भेजा गया। प्राप्त वैज्ञानिक रिपोर्टों को चिकित्सकीय एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में शामिल किया गया।

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना को केवल परिस्थितिजन्य तथ्यों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को आपस में जोड़कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

आरोपी को दोषसिद्ध कर सुनाई गई फांसी की सजा

विशेष दाण्डिक प्रकरण (पॉक्सो) क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी, विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने आरोपी सोमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग को दोषसिद्ध किया।

न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ड) एवं 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) एवं 238(क) के तहत आरोपी को दोषी माना।

पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) में मृत्युदंड के साथ प्रत्येक धारा में पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। वहीं धारा 238(क) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। न्यायालय के आदेश के अनुसार सजाएं एक साथ भुगताई जानी हैं।

पीड़ित परिवार को सात लाख रुपये क्षतिपूर्ति

न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के तहत सात लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया है। पुलिस के अनुसार मामले में कार्रवाई का उद्देश्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पीड़ित परिवार को न्यायिक प्रक्रिया तक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हुए साक्ष्यपूर्ण और विधिसम्मत तरीके से प्रकरण को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना रहा।

एसपी ने गठित की थी विशेष टीम

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर के नेतृत्व में टीम ने मामले की पतासाजी, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलन, आरोपी की गिरफ्तारी, एफएसएल और डीएनए परीक्षण सहित न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा और विवेचक सहित थाना मोहन नगर के पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों का भी विवेचना में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

विशेष लोक अभियोजक की रही अहम भूमिका

प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। पुलिस के अनुसार अभियोजन और विवेचना टीम के समन्वित प्रयासों से वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

बाल अपराधों में त्वरित कार्रवाई पर जोर

दुर्ग पुलिस ने कहा कि इस मामले में सूचना मिलते ही बालिका की तलाश, चिकित्सकीय सहायता, घटनास्थल को सुरक्षित करना, साक्ष्य संकलन, वैज्ञानिक परीक्षण और प्रभावी विवेचना को प्राथमिकता दी गई। पुलिस ने कहा कि महिला और बाल अपराधों के मामलों में त्वरित, निष्पक्ष, संवेदनशील और वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी अथवा अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। समय पर मिलने वाली सूचना से पुलिस को त्वरित कार्रवाई के साथ महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित करने में मदद मिलती है।

बालिका की पहचान की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने उसके नाम, फोटो, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली अन्य कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

Link : https://shricgnewscreator.com/accused-sentenced-to-death-in-the-rape-and-murder-case-of-a-six-year-old-girl/

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