एलआईसी में सजी काव्य संध्या, कवियों ने हिंदी की महिमा और राष्ट्रभक्ति के रंग बिखेरे

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हिंदी पखवाड़े में साहित्य सृजन संस्थान के सहयोग से हुआ कवि सम्मेलन, कवियों ने रचनाओं से बांधा समां
रायपुर।भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय पंडरी रायपुर में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम में साहित्य सृजन संस्थान परिवार के कवियों सर्वश्री यशवंत चतुर्वेदी, डॉ. अर्चना पाठक “निरंतर”,शायर जावेद नदीम “नागपुरी”,डॉ.लक्ष्मीकांत पण्डा एवं कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती अर्पणा सिंह “अर्पी’ जी द्वारा किया गया।
विगत 5 वर्षों से जीवन बीमा निगम द्वारा हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के कवि सम्मेलन कार्यक्रम में साहित्य सृजन संस्थान के सहयोग से किया जा रहा है।
हस्ताक्षर हिंदी करें, हिंदी में हो काज।
अपनी भाषा बोल लो, इसमें क्या है लाज।।
छंद गीत श्रृंगार सब, हिन्दी की पहचान।
सीधी सादी है बहुत ,सदा बढ़ती मान।।
डॉ. अर्चना पाठक “निरंतर”

रायपुर, भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय पंडरी रायपुर में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम में साहित्य सृजन संस्थान परिवार के कवियों  यशवंत चतुर्वेदी, डॉ. अर्चना पाठक “निरंतर”, शायर जावेद नदीम “नागपुरी”, डॉ. लक्ष्मीकांत पण्डा एवं कार्यक्रम का सफल संचालन अर्पणा सिंह “अर्पी’  द्वारा किया गया।

विगत 5 वर्षों से जीवन बीमा निगम द्वारा हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के कवि सम्मेलन कार्यक्रम में साहित्य सृजन संस्थान के सहयोग से किया गया ।

हस्ताक्षर हिंदी करें, हिंदी में हो काज।
अपनी भाषा बोल लो, इसमें क्या है लाज।।
छंद गीत श्रृंगार सब, हिन्दी की पहचान।
सीधी सादी है बहुत ,सदा बढ़ती मान।।
डॉ. अर्चना पाठक “निरंतर”

न रिश्ते जुड़े हैं कभी खोट से
न ही सोचकर भावनाएँ जुड़ीं,
जहाँ पर सहजता न हो फिर वहाँ,
कहाँ दिल से दिल की वफ़ाएँ जुड़ीं
सहजताओं के चंद अक्षर लिए।
एक कविता मधुर सी कहो तो चलो।
डॉ. लक्ष्मीकांत पण्डा

बूढ़ा बरगद ढूंढ रहा है, आशाओं के दीप लिए अपने बीते बचपन के दिन ये उसकी नादानी है
शायर जावेद नदीम “नागपुरी”

अंतस में हो भारत,भारती
रंग तिरंगा तन-मन-प्रण,जन में
हो “वंदे मातरम्” संकल्प मंत्र
भारत के जन-गण-मन,जीवन में
सार्धकोटि जनबल की शक्ति
अमर शहीदों के बलिदान
निर्मल,पावन राष्ट्रभक्ति का
प्रतिदान सदा हो राष्ट्रोत्थान
विश्व गुरु का किरीट सजाने
चरितार्थ करो,गीता का ज्ञान।                                           यशवंत कुमार चतुर्वेदी

बहन उर्दू की देखो भाल की बिंदी है ये हिंदी।
सभी भाषाओं की पहली सुबह औ शाम है हिंदी।
जनम जब से लिया बोली तभी से प्यार की भाषा।
तुम्हें शायद पता होगा कि उसका नाम है हिंदी।              अर्पणा सिंह अर्पी

मंडल प्रबंधक अमित श्रीवास्तव, प्रशासनिक अधिकारी एवं हिंदी राजभाषा अधिकारी आलोक धुरिया, संदीप सोनी, एस. माधवी राव, सहायक मंडल प्रबंधक गिरीश कुमार सिन्हा, अनुरोध शर्मा, एन जे राव, मोहन साहू, धर्मेंद्र यादव, सूरज दीप, दीपक जेम्स, जैकब सकारिया, राजेश बाघ, राजेश यादव, एन. ऊषा राव, प्रेरणा ठाकुर, सीमा वाढेर, अनुपमा कैमरो, हेमलता केशवानी, गायत्री दिनकर, रश्मि पॉल, संध्या राज इत्यादि उपस्थित रहे।

Link : https://shricgnewscreator.com/a-poetic-evening-was-hosted-at-lic-where-poets-celebrated-the-glory-of-hindi-and-evoked-the-spirit-of-patriotism/

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