परिवार और विद्यालय के समन्वय से ही बच्चों का बेहतर भविष्य संभव: चिरंजीव जैन

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आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में पेरेंटिंग पर व्याख्यान का आयोजन

भिलाई, सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ की ओर से प्रांतीय आचार्य सामान्य प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर डोगरगढ़ में 13 मई से 29 मई तक जारी है। इसी श्रृंखला में पेरेंटिंग विषय पर जाने माने पैरेंटिंग विशेषज्ञ चिरंजीव जैन ने विशेष मार्गदर्शन दिया। इस सत्र में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्यों (शिक्षकगण) ने सहभागिता दी।

इस दौरान चिरंजीव जैन ने बच्चों के सर्वांगीण विकास, संस्कारयुक्त शिक्षा, अभिभावकों की भूमिका तथा वर्तमान समय में सकारात्मक पेरेंटिंग की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि परिवार और विद्यालय के समन्वय से ही बच्चों का बेहतर भविष्य निर्माण संभव है।

उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आप ऐसा कुछ कीजिए कि पूरी क्लास आपकी फैन हो जाए। बच्चों को भी लगे कि इस मैडम या सर की क्लास मिस नहीं करना है। अगर आपने अपनी क्लास में ऐसी स्थिति बना दी तो बच्चों को भी आपकी क्लास का इंतजार रहेगा और बच्चा रात में भी जागकर आपकी क्लास की तैयारी करेगा। उन्होंने कहा कि आज पैरेंटिंग का सबसे जरूरी हिस्सा है हम बच्चों का सम्मान करें और उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि आप खुद याद कीजिए कि आपने बच्चों की खुलकर प्रशंसा कब की। हमें लगता है कि ज्यादा प्रशंसा करेंगे तो बच्चे बिगड़ जाएंगे, जबकि ऐसा नहीं है। एक वक्त होता है, जब आपका बच्चा लड़खड़ा कर कदमों से चलना शुरू करता है तो आप तालियां बजाते हैं। इससे आपका बच्चा खुश होकर और तेज कदमों से चलना शुरू करता है। आपकी तालियां बढ़ती हैं तो बच्चा दौड़ना भी सीख जाता है। आपको अपनी क्लास में भी यही नियम को याद रखना है। उन्होंने कहा कि हम लोग क्लास में अक्सर आगे की दो बेंच देखकर पूरी पढ़ाई करा देते हैं क्योंकि आखिरी में 2-3 बेंच में बैठे हैं, उनको देखकर हम परेशान हो जाते हैं। जबकि आपको समझना चाहिए कि एक भरी पूरी क्लास के बच्चों को आपसे ढेर सारी उम्मीदें हैं। इस अवसर पर आचार्यों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में शिक्षकों और अभिभावकों की संयुक्त जिम्मेदारी पर विचार-विमर्श किया।

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