भिलाई 3, छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति पर आधारित लोक आनुष्ठानिक पर्व भोजली को जन-जन में पुनः प्रसारित करने की दृष्टि से भिलाई-चरोदा निगम क्षेत्र के 40 वार्डों को जोड़ते हुए निगम स्तरीय भोजली उत्सव का आयोजन किया गया है।
उत्सव के दूसरे वर्ष में मुख्य संयोजक प्रेमलाल साहू जिला प्रवक्ता भाजपा भिलाई व जनजाति शोधार्थी एवं लोक संस्कृति कर्मी राम कुमार वर्मा संयोजन में किया गया है। इसमें सहभागियों की संख्या में निरंतर बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा के अनुरुप संपूर्ण भारत के अन्य भागों में भी ‘भोजली’ अलग-अलग नामों से बोई जाती है। इसे उड़िया समुदाय द्वारा ‘भुगली’, सिंधी समुदाय द्वारा ‘ट्रीजड़ी माता’, ‘बैगा’ जनजाति द्वारा ‘खुजलैया माता’, बुंदेलखंड के महोबा क्षेत्र में ‘कजली’ व ‘भुजरिया’, वहीं महाराष्ट्र के गौर बंजारा समुदाय द्वारा ‘तीज पर्व’, मध्य प्रदेश के गोंड़ समुदाय द्वारा ‘पीली माई’ आदि के रुप में आयोजित की जाती है।
इसे श्रावण मास की अमावस्या से लेकर पूर्णिमा तक आयोजित की जाती है। जो मूलतः रबी व कोदवारी फसल के बीजों गेहूं , जौ, मूंग,उड़द, तिवड़ा, सरसों, ज्वार,बाजरा, तिल,अरहर को बॉंस की नई टोकरी में खाद-मिट्टी डाल कर अंकुरण की पहचान और आने वाली फसलों का अनुमान लगाने के लोक अनुष्ठान पर्व है। इसे देखकर किसान समझ लेते हैं कि उनके आने वाली फसल बहुत अच्छी होगी और इससे उनके घर परिवार की खुशहाली बढ़ेगी। इसे बहन-बेटियों की सुरक्षा के साथ जोड़कर नन्हीं बालिकाओं द्वारा इसे 11 दिनों सेवा करके स्थानीय नदी तालाब में गंगा स्नान के रुप में विसर्जित कर दी जाती है। भोजली की पीली पीली पत्तियां को एक दूसरे के कान पर खोंस कर घर परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं बड़े-बड़े भोजली को नन्हें बच्चों के सिर पर रखकर या कान पर खोंच कर उन्हें आशीष देते हैं। हमजोली बालिकाएं , महिलाएं एक-दूसरे के कान पर भोजली खोंस कर ‘भोजली बदते’ हैं जो मित्रता का प्रतीक होता है। इस तरह भोजली संपूर्ण भारत देश सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जाति-समुदाय द्वारा परंपरागत रुप से मनाई जाती है। इसमें आपसी सहयोग, सद्भावना, परस्पर मिलन और मित्रता बढ़ाने की परंपरा आज भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। बुंदेलखंड में इसे आल्हा-ऊदल की वीरता और चंदेल राजा परमाल की राजकुमारी चंद्रावली सहित उनकी 1400 साथियों द्वारा किरत सागर में भोजली उझोने, विसर्जन करने को ‘कजली महोत्सव’ और ‘विजयोत्सव’ के रुप में आज भी उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस आयोजन के लिए सभी 40 वार्डों की महिलाओं को प्रेरित कर निरंतर विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें पू्र्व निगम अध्यक्ष सीता साहू, चंद्रकांता मांडले, सुषमा जेठानी, तुलसी मरकाम, प्रेमलता चंद्राकर ,पूर्णिमा ठाकुर, गीता साहू, शिवकुमारी यादव, साधना वर्मा, पुष्पा डोंगरे, पूनम श्रीवास्तव, लता धुरंधर, लता मढ़रिया, नम्रता विश्वकर्मा, जमुना बंछोर, सुजाता डोंगरे, श्वेता स्वर्णकार, बलजीत कौर, इंदू साहू, प्रतिमा वर्मा, गायत्री साहू, उषा चौहान, शतरुपा निर्मलकर, कमल निषाद, रेखा वर्मा, देवकी चंद्राकर, गिरिजा श्रीवास, कविता वर्मा, किरण ठाकुर, इदू साहू, हीरा साहू, अंजू वर्मा, सुरेंद्र देवांगन, रेवती साहू, गायत्री साहू, मंजु साहू, रेखा वर्मा, दयादास साहू, रीना चंद्राकर, मेनका यादव, हीरावती सोनी, जय नारायण साहू, यामिनी ठाकरे, प्रदीप यादव, कमल वर्मा, प्रतिमा वर्मा, सुनीता देवी, मंजू साहू, भारती पटेल, हरीश साहू, गंगा डोंगरे, रवी नाहर, महेश ,कमल तांडी आदि सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। रक्षाबंधन के दिन भोजली को राखी अर्पित कर 31 अगस्त 2026 की संध्या काल में मिनी स्टेडियम भिलाई 3 से गतवा तालाब तक शोभा यात्रा कर समारोहपूर्वक गाजे बाजे के साथ भोजली विसर्जित की जाएगी।
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