एक नहीं भाषा भाषी यहां कई पंथ के रखवाले l नानक और बुद्ध की गुरुवाणी हैं संत कबीर के मतवाले ll

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भिलाई, देशभक्ति के जज्बे से भरे हुए संगीत मई गीतों और रचनाओं के माध्यम से निर्मल ज्ञान मंदिर (कबीर आश्रम), नेहरू नगर भिलाई में बहुत ही जोश के साथ स्वाधीनता दिवस मनाया गया ।

मुख्य अतिथि डॉक्टर हीरा लाल, अध्यक्ष आत्मा राम, संत साहेब उमेंद्र व धनंजय साहेब की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया गया । पश्चात सदस्यों द्वारा अपने विचार रखे गए कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डालेश्वरी साहू, सरस्वती, प्रेमलता, इंद्र कुमार धनकर,डाक्टर हीरा लाल, संत साहेब धनंजय व उमेंद्र साहेब द्वारा प्रस्तुत दो नवीन देशभक्ति गीत “वीरों शहीदों की भूमि को प्रणाम” और “कदम कदम पर आज हमारे” रहे । तिलक वर्मा द्वार मेरा रंग दे बसंती चोला हीरा लाल द्वारा जहां डाल डाल पर और डालेश्वरि साहू  द्वारा गुरूवंदना प्रस्तुत की गई ।

आश्रम के अध्यक्ष आत्माराम साहू द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । इस दौरान शिव कुमार साहू, पी.डी. साहू, डॉ. दीनदयाल साहू, संत राम साहू, परमानंद वर्मा, अशोक साहू, विनोद साहू, मंजीद अदब, गौ करण साहू, लक्ष्मी साहू, उर्मिला साहू उपस्थित रहे।

*कोई मुझसे पूछे कौन हो तुम*
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कोई मुझसे पूछे कौन हो तुम
कह दूंगा मैं कुछ खास हो तुम
शब्दों से बिखरे रिश्तों का
नि:शब्द सहज विन्यास हो तुम
किसी मरुस्थल में अधरों पर
बन अब्र बुझाती प्यास हो तुम
गज़ल कहूँ या नज़्म मैं तुमको
या शायर का एहसास हो तुम

*कोई मुझसे पूछे कौन हो तुम*
*कह दूंगा मैं कुछ खास हो तुम*

संतप्त बुझे से चेहरों पर
एक नया उल्लास हो तुम
ओझल होती उम्मीदों का
संबल हो विश्वास हो तुम
विनय हो तुम हर विनती की
पूजा हो अरदास हो तुम

*कोई मुझसे पूछे कौन हो तुम*
*कह दूंगा मैं कुछ खास हो तुम*

चारुरूप धर अंशुमालिका
इस जग का सन्यास हो तुम
ऋतुबसन्त या सावन सुख में
महका महका मधुमास हो तो
अमलतास के फूलों जैसी
पीयूष भरी मिठास हो तुम

*कोई मुझसे पूछे कौन हो तुम*
*कह दूंगा मैं कुछ खास हो तुम*

खिले हुए उत्पल जल थल में
उन भीतर आवास हो तुम
आदि अंत हो अध्य आत्म का
उप आसन हो उपवास हो तुम
शशि मुख मृदुल मुकुल कामिनी
भूधर अवनी सहवास हो तुम

*कोई मुझसे पूछे कौन हो तुम*
*कह दूंगा मैं कुछ खास हो तुम*

मेरी अर्हण का अवयव हो
कलना संग सुरवास हो तुम
दर्प नाशिनी दृग मयूख
सहज भाव अभ्यास हो तुम
मर्यादा का विमल बढ़ाती
भूपति का वनवास हो तुम

*कोई मुझसे पूछे कौन हो तुम*
*कह दूंगा मैं कुछ खास हो तुम*

Link : https://shricgnewscreator.com/here-speakers-of-diverse-languages-and-guardians-of-various-faiths-coexist-the-teachings-of-nanak-and-buddha-resonate-alongside-the-spirit-of-saint-kabirs-devoted-follower/

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