हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग, एबीवीपी ने सौंपा ज्ञापन

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भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों पर उच्च स्तरीय जांच, विशेष ऑडिट और जवाबदेही तय करने की उठाई मांग, सात दिन में कार्रवाई का मिला आश्वासन

दुर्ग, 3 जून 2026, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं एवं प्रशासनिक भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बुधवार को कुलपति को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान पर लग रहे गंभीर आरोप न केवल उसकी साख को प्रभावित करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों के हितों और शैक्षणिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इसलिए पूरे मामले की गहन जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।

एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े सभी मामलों की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। परिषद का कहना है कि हाल के दिनों में विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित खबरों के माध्यम से विश्वविद्यालय में वित्तीय गड़बड़ियों और प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिससे विद्यार्थियों और समाज के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

परिषद ने मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को प्रशासनिक दायित्वों से पृथक रखा जाए ताकि जांच प्रक्रिया किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो। साथ ही विश्वविद्यालय के विगत वर्षों के वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों का विशेष अंकेक्षण (स्पेशल ऑडिट) कराने की भी मांग की गई है। एबीवीपी ने कहा कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सिद्ध होता है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर विभागीय और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके अलावा जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक कर विद्यार्थियों तथा समाज को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए।

विश्वविद्यालय की साख और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय : एबीवीपी

विद्यार्थी परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का केंद्र है। ऐसे में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। परिषद का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

दुर्ग नगर मंत्री गजानंद साहू ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को आरोपों पर चुप्पी साधने के बजाय पारदर्शी जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि परिषद द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद कुलपति ने सात दिवस के भीतर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

कुलसचिव से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी : रूपेश कुर्रे

जिला संयोजक रूपेश कुर्रे ने कहा कि कुलसचिव से जुड़े जिन गंभीर आरोपों की जानकारी समाचार माध्यमों के माध्यम से सामने आई है, उसने पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय की सरकारी गाड़ी का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया गया है और उसके मरम्मत का खर्च विश्वविद्यालय के खाते से वहन किया गया है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है।

रूपेश कुर्रे ने कहा कि विद्यार्थी परिषद का स्पष्ट मत है कि यदि संबंधित अधिकारी निर्दोष हैं तो उन्हें निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए। जांच के माध्यम से ही सच्चाई सामने आएगी और सभी शंकाओं का समाधान हो सकेगा।

छात्र हितों पर नहीं होगा समझौता

साइंस महाविद्यालय दुर्ग इकाई अध्यक्ष निमिष देवांगन ने कहा कि विद्यार्थी परिषद छात्र हितों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर समझौता नहीं करेगी। विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए संगठन लगातार संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चरणबद्ध आंदोलन

एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयावधि में इस गंभीर विषय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन छात्र हितों एवं विश्वविद्यालय की गरिमा की रक्षा के लिए चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन प्रारंभ करेगा। परिषद ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास संस्थान पर बना रहे।

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