दुर्ग में हाईटेक मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ

Editor
By Editor 3 Min Read

अब घटनास्थल पर ही होगी डिजिटल, फिंगरप्रिंट और बैलिस्टिक जांच, अपराधियों तक पहुंचना होगा आसान

दुर्ग, छत्तीसगढ़ में अपराध नियंत्रण और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। दुर्ग के सेक्टर-4 स्थित फॉरेंसिक लैब परिसर में शुक्रवार को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

कार्यक्रम में दुर्ग सांसद विजय बघेल, दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह, दुर्ग रेंज आईजी अभिषेक शांडिल्य और एसएसपी विजय अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

65 लाख की लागत से तैयार हाईटेक वैन

राज्य सरकार द्वारा लगभग 65 लाख रुपये की लागत से तैयार इस मोबाइल फॉरेंसिक वैन को अत्याधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक उपकरणों से लैस किया गया है। इसमें डिजिटल फॉरेंसिक जांच, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन, नार्कोटिक्स टेस्टिंग किट, बैलिस्टिक जांच प्रणाली सहित कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इसके अलावा वैन में हाईटेक कैमरे और डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं, जिनकी मदद से घटनास्थल के साक्ष्यों को सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड कर अदालत में डिजिटल एविडेंस के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा।

घटनास्थल पर ही मिलेगी प्राथमिक जांच रिपोर्ट

अधिकारियों ने बताया कि अब किसी भी गंभीर अपराध की स्थिति में पुलिस टीम मौके पर ही वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र कर सकेगी। मोबाइल फॉरेंसिक वैन घटनास्थल पर पहुंचकर तत्काल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट भी तैयार करेगी। इससे जांच प्रक्रिया तेज होगी और अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को बड़ी मदद मिलेगी।

पहले घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को जांच के लिए दूर स्थित प्रयोगशालाओं तक भेजना पड़ता था, जिससे रिपोर्ट आने में काफी समय लगता था। कई बार साक्ष्यों के खराब होने या जांच प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मौके पर ही जांच संभव होने से जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आएगा।

अपराध नियंत्रण में तकनीक बनेगी बड़ी ताकत

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार लगातार अपराध नियंत्रण और आधुनिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। मोबाइल फॉरेंसिक वैन पुलिस और फॉरेंसिक टीम के बीच समन्वय को मजबूत करेगी तथा हत्या, चोरी, साइबर अपराध और नार्कोटिक्स मामलों की जांच में विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी।

अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में प्रदेश के अन्य प्रमुख जिलों में भी इस प्रकार की मोबाइल फॉरेंसिक इकाइयों का विस्तार किया जाएगा, ताकि वैज्ञानिक जांच प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

Share This Article