भारतीय ज्ञान परम्परा को रेखांकित करती है आचार्य महेश की पुस्तक: रावत

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भिलाई, तुलसी मानस प्रतिष्ठान भोपाल की मुखपत्रिका “मानस भारती” के सम्पादक एवं विचारक देवेंद्र कुमार रावत के अनुसार इस्पात नगरी भिलाई के प्रसिद्ध साहित्याचार्य एवं लेखक डॉ.महेश चन्द्र शर्मा की कृति “साहित्य और समाज” राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा को रेखांकित करती है। यह विविध शिक्षाओं से सारगर्भित 126 लघु ललित निबंधों का संग्रह है। इसमें बताया गया है कि साहित्य समाज का दर्पण है और संस्कृति साहित्य की आत्मा है।

साहित्यिक संस्था “आरम्भ” के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेश चन्द्र शर्मा देश-विदेश के अनेक सफल शैक्षणिक और साहित्यिक भ्रमण कर चुके हैं। उनकी दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। विगत दिनों आरम्भ के राज्यस्तरीय काव्य संवाद समारोह की पुस्तक प्रदर्शनी में भी साहित्य प्रेमियों ने डॉ. महेश शर्मा की उक्त पुस्तकों का भी अवलोकन किया।छत्तीसगढ़ के बाहर भी डॉ. शर्मा पुस्तकें लोकप्रिय हैं। इसी क्रम में भोपाल के देवेन्द्र कुमार रावत ने बताया कि ” साहित्य और समाज” से पाठक के चरित्र सेतु का निर्माण होता है और सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसमें भारत वर्ष की व्याख्या करते हुवे आचार्य ने बताया है कि ज्ञान-विज्ञान में लगा हुआ भारत इसकी भूमण्डलीय वर्षा करता है। प्रगति और आत्मोन्नति के लिये ऋषि – मुनियों ने शोध करके जो निष्कर्ष निकाले उन सूक्तियों के मोतियों की माला के रूप में आचार्य शर्मा ने इस पुस्तक की रचना की है।

छत्तीसगढ़ (रायपुर) से प्रकाशित 280 पृष्ठों की, सहज,सरल किन्तु सरस भाषा-शैली में लिखित ये किताब युवाओं और विद्यार्थियों के लिये ही नहीं बल्कि वयोवृद्ध पाठकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिये भी संग्रहणीय और उपयोगी है। निबन्धों के साथ बीच-बीच में दिये रेखाचित्रों से विषय और भी रोचक और ज्ञानवर्धक हो जाते हैं।

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