रायपुर के वृंदावन हॉल में आयोजित काव्य संध्या में देशभर के कवि-शायरों ने दी यादगार प्रस्तुतियां, प्रतिभाओं का सम्मान और सेवा भाव की अनोखी पहल भी रही आकर्षण का केंद्र
रामभद्र, श्री जामदग्न्य, भृगुवंशी, परशुराम, कर जोड़ करूं प्रणाम
परशुराम जयंती पर साहित्य सृजन संस्थान ने किया काव्य संध्या का आयोजन
रायपुर, भगवान परशुराम की जयंती पर रविवार 19 अप्रैल को साहित्य सृजन संस्थान ने काव्य संध्या का आयोजन किया। सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हॉल में आयोजित इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, इतिहासकार और पूर्व आईएएस डॉ. संजय अलंग रहे, जबकि अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के तौर पर दिव्या पाण्डेय ‘शिवानी’, रायगढ़, समीर गडकरी, वरिष्ठ कवि, शायर सुदेश कुमार मेहर, गीतकार राजकुमार धर द्विवेदी, पूनम ऋतु सेन मचासीन रहे।
मौसम की तल्खी के बावजूद बड़ी संख्या में कवि- कवयित्रियों ने कार्यक्रम में शिरकत की और अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। दोपहर 3 बजे आयोजित यह कार्यक्रम देर शाम तक चलता रहा। इस दौरान काव्य पाठ के अलावा कई प्रतिभाओं और अन्य विशिष्ट जन को सम्मानित भी किया गया।

काव्य गोष्ठी की झलक:
रामचंद्र श्रीवास्तव ने भगवान परशुराम पर अपनी उम्दा प्रस्तुति दी- रामभद्र, श्री जामदग्न्य, भृगुवंशी, परशुराम।
पुत्र रेणुका जमदग्नि के लाड़ले परशुराम।
कर जोड़ करूं प्रणाम।
गीतकार राजकुमार धर द्विवेदी ने भगवान परशुराम के स्वप्न में दर्शन कर सुंदर संदेश दिया। उन्होंने दोहा पढ़ा-
परशुराम फरसा लिए, मिले स्वप्न में आज।
बोले- भ्रष्टाचार से, लड़ना बेटा राज।।
वरिष्ठ कवि डॉ. संजय अलंग ने पढ़ा –
मेरे घर के पीछे एक नदी रहती है
जो बिल्कुल पानी जैसी है
नदी इतनी लंबी है
वह कहीं से शुरू होकर
कहीं दूर तक खत्म होती है
मैंने सोचा
अगर नदी को मोड़कर
अपने बस्ते में रख लूं
तो क्या मछलियां मेरी किताबों के बीच तैरेंगी?
और क्या भूगोल के नक्शे में
पानी के धब्बे पड़ जाएंगे
नदी चलती है पर पैर नहीं दिखते
वह शोर करती है पर उसके मुंह नहीं है।
इसी तरह जाने-माने कवि राकेश अग्रवाल ने श्रेष्ठ काव्य पाठ किया-
राम वनवास को, संग सीता चले।
राज के ताज को, राम रीता चले।।
राम के तुम लखन,भांति भ्राता बनो।
शस्त्र धारण करो, शास्त्र ज्ञाता बनो।।
सुप्रसिद्ध शायर सुखनवर हुसैन ने समां बांधा-
बड़े बड़ों को ये शायद पता नहीं होता,
किसी को मार के कोई बड़ा नहीं होता।
जो बेवफ़ा हैं उन्हें आप बेवफ़ा कहिए,
हरेक शख़्स मगर बेवफ़ा नहीं होता।
शायर सुदेश कुमार मेहर ने पढ़ा –
सत्य-अहिंसा जीवन-दर्शन चश्मा चरखा गांधी है,
कुछ लोगों ने समझ लिया है बस इक चेहरा गांधी है।
कश्विता जालान ने सुनाया-
यादों को तेरी तकिया बना लिया हमने
कभी लिपटकर रोए बहुत,
कभी सिरहाने सजा लिया हमने।
कभी जी भर के बातें कीं,
कभी गले लगा लिया हमने।
रायगढ़ से आईं कवयित्री दिव्या पांडेय ‘शिवानी’ ने सशक्त रचना पढ़ी –
बस अपने भावों व विचारों को साकार करता हुआ..
नियति के आदेश से..
एक दिन संसार से विदा लेता हैं..
अपने पीछे छोड़ जाता है.
देश व समाज के लिए..
साहित्य रूपी अमूल्य धरोहर…
वह जीवित रहते हैं..
अपने लिखें. काव्य, गद्य,
से संकलित किताब मे..
चिरकाल तक..
अजर अमर..
मेरे साहित्यकार…
इनके अलावा बिलासपुर से आईं वंदना ठाकुर ने अक्षय तृतीया पर रचना पढ़ी –
बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया,
अक्षय तृतीया कहलाती है,
शुभ मंगल दायक है यह तिथि,
सौभाग्य शांति ले आती है!
सीमा पांडेय ने सुनाया –
वो अपने हिस्से की खुशियां भी मुझ पे वार देती है, थपकियां देकर, मेरी मुश्किलों को मार देती है।
मैं जब भी टूटकर बिखरूं, सहारा देने आ जाए,
मेरी मां की दुआ मुझको भंवर से तार देती है।
कवयित्री पंखुरी मिश्रा ने पढ़ा –
झूले संग मन झूला करता
ऐसा भी सावन था
सादे कपड़ों में वो लड़का
मेरा मनभावन था
उसे देख हौले मुस्काती
प्रेम बहुत पावन था
संग जहां पर झूला करते
आंगन वृंदावन था
झूले संग मन झूला करता
ऐसा भी सावन था।
मंजूषा अग्रवाल ने सुनाया –
मैं मंजूषा हूं…
गांव की साधारण-सी गोरी
ना ज्यादा सपने,
न कोई बड़ी, कहानी
बस दिल में एक छोटा सा कोना था
जहां उनकी निशानी थी।
सारंगढ़ से आए कवि विजय कुमार कोसले ने सुनाया –
किस्मत के भी खाते खुलते, मेहनत की सौगात में।
मान प्रतिष्ठा यश मिले न, लाख चाहें खैरात में।।
हर कठिनाई जीवन में एक, नई सबक सिखाते हैं।
धैर्यवान न धीरज खोते, कभी मुश्किल हालात में।।
कार्यक्रम में हबीब खान समर बागबाहरा, विजय चंद्रवंशी, किशोर लालवानी, आशा मानव, तेजेंद्र साहू, संजय देवांगन, सूरज प्रकाश सोनी, राजेश बत्रा, गोपाल प्रसाद जोशी, अजन्नेय पाण्डेय, साकेत पाण्डेय रायगढ़, सफदर अली, यू सुदर्शन पटनायक, नीता पटनायक, आरके शिवपुरी, दिलीप श्रीवास्तव, सरफराज हुसैन, एचएस ठाकुर, कंचन सहाय ने उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम का आनंद लिया।कार्यक्रम का सफल संचालन उमेश कुमार सोनी “नयन” और कश्विता जालान द्वारा किया गया।

एक अनोखी पहल…
साहित्य सृजन संस्थान की काव्य संध्या में दोपहर की गर्मी को देखते हुए जहां शीतल पेय को व्यवस्था एचएस ठाकुर ने की। वहीं राजकुमार पाण्डेय द्वारा मिठाई खिलाई और भाटापारा से आए श्रोता लक्ष्मण सिंह राजपूत ने मंच पर उपस्थित स्थितियों के लिए शॉल और बुके उपलब्ध कराया।


