अक्षय तृतीया आज: शुभ मुहूर्त में खरीदारी और पूजन से अक्षय फल की प्राप्ति

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सोना-चांदी, भूमि, वाहन खरीद का विशेष महत्व; भगवान विष्णु-लक्ष्मी पूजन और दान-पुण्य से बढ़ती है समृद्धि

भिलाई, रविवार, 19 अप्रैल, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व अक्षय तृतीया इस वर्ष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए इसे “अक्षय” कहा जाता है। खास बात यह है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरा दिन ही शुभ माना जाता है।

शुभ मुहूर्त

पंडितों के अनुसार तृतीया तिथि का आरंभ प्रातः से ही शुभ प्रभाव लेकर आता है। सुबह स्नान-दान के बाद पूजन का विशेष महत्व है।

  • प्रातः काल: सूर्योदय से दोपहर तक सर्वोत्तम 10.49 am से 12.20pm तक सरसों तेल के तीन दीपक लंबी बाती वाले अवश्य जलाए पहला दीपक रसोई घर में पानी पात्र के समक्ष, दूसरा अपने घर के मुख्य द्वार पर और तीसरा चार बाती के दीपक दक्षिण दिशा में, तीनों दीपक में पीली सरसों और काला तिल थोड़ी मात्रा में जरूर मिलाए
  • अभिजीत मुहूर्त: लगभग दोपहर 12 बजे के आसपास (स्थानीय पंचांग अनुसार)
  • प्रदोष काल: संध्या समय पूजन भी फलदायी दीपक अवश्य जलाए
  • तृतीया तिथि 19 अप्रैल 10.49 से आरंभ होकर 20 अप्रैल सुबह 7.27 बजे समाप्त होगी

क्या करें इस दिन

अक्षय तृतीया पर किए गए ये कार्य विशेष फलदायी माने गए हैं—

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान से करें
  • सोना, चांदी, बर्तन, भूमि या वाहन खरीदना शुभ
  • गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र का दान
  • जौ, सत्तू, खीरा, शरबत आदि का दान विशेष पुण्यकारी
  • विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करने के लिए श्रेष्ठ दिन

पूजन विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर विष्णु सहस्रनाम या लक्ष्मी मंत्र का जाप करें। अंत में नैवेद्य अर्पित कर आरती करें।

क्या न करें

  • इस दिन किसी से विवाद या झगड़ा न करें
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • किसी का अपमान या अनादर न करें
  • बिना जरूरत खर्च और दिखावे से बचें

धार्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। साथ ही मान्यता है कि इसी दिन से त्रेता युग का आरंभ हुआ। इसलिए यह तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है।

निष्कर्ष

अक्षय तृतीया केवल खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि दान, पूजा और सकारात्मक कार्यों के माध्यम से जीवन में सुख-समृद्धि लाने का अवसर है। श्रद्धा और नियम के साथ किए गए कार्य निश्चित रूप से अक्षय फल प्रदान करते हैं।

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