भिलाई। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। चरोदा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार को भारी अव्यवस्था देखने को मिली, जहां गर्भवती महिलाओं को घंटों इंतजार के बावजूद जांच नहीं मिल सकी।
जानकारी के अनुसार, हर माह की 9 एवं 24 तारीख को यहां गर्भवती माताओं की विशेष जांच की जाती है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुबह 9 बजे से ही महिलाएं अस्पताल पहुंचने लगी थीं। चरोदा सहित आसपास के गांवों से आई करीब 35 गर्भवती महिलाएं दोपहर 2 बजे तक अस्पताल में मौजूद रहीं, लेकिन जांच के लिए महिला डॉक्टर नहीं पहुंची।
घंटों इंतजार से महिलाएं और उनके परिजन परेशान होते रहे, जबकि अस्पताल स्टाफ केवल आश्वासन देता रहा कि डॉक्टर आने वाली हैं। समय बीतने के साथ स्थिति और गंभीर होती गई एक महिला की तबीयत भी बिगड़ने लगी। इससे आक्रोश की स्थिति भी बन गई थी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पहले भी कई बार ऐसी लापरवाही सामने आ चुकी है, बावजूद इसके व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। अस्पताल परिसर में गंदगी और अव्यवस्था को लेकर भी मरीजों ने नाराजगी जताई।
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी तत्काल संज्ञान लेकर व्यवस्था सुधारें, ताकि गर्भवती महिलाओं जैसी संवेदनशील श्रेणी को समय पर और बेहतर उपचार मिल सके।


