छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक सौंदर्य देखा वाईएचएआई सदस्यों ने, धरोहरों को भी समझा

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भिलाई इकाई का नेचर ब्यूटी स्टडीज, आर्कियोलॉजिकल साइट, कल्चरल स्टडीज एवं ट्रैकिंग सह ट्रेनिंग पर केन्द्रित दो दिवसीय आयोजन

भिलाई,  यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया दुर्ग भिलाई इकाई द्वारा नेचर ब्यूटी स्टडीज, आर्कियोलॉजिकल साइट, एवं कल्चरल स्टडीज पर केन्द्रित दो दिवसीय ट्रैकिंग सह ट्रेनिंग का आयोजन किया गया । इस आयोजन में सभी आयु वर्ग के कुल 37 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आयोजन में सदस्यों ने नरसिंह नाथ मंदिर पाईकमाल, माँ चण्डी मन्दिर घुँचापाली बागबाहरा, लक्ष्मण मन्दिर सिरपुर, गन्धेश्वर महादेव मंदिर सिरपुर, राम मंदिर रायपुर एवं चोकर धानी रायपुर का अवलोकन किया।

यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया छत्तीसगढ़ के सचिव एवं दुर्ग भिलाई इकाई के चेयरमेन के. सुब्रमण्यम ने आयोजन के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिभागी सर्वप्रथम ओडिशा के बरगढ़ जिले में गंधमर्दन पर्वत की सुरम्य तलहटी में स्थित प्राचीन नरसिंह नाथ मंदिर के दर्शन किये। यहाँ के प्राकृतिक सौन्दर्य और भौगोलिक वातावरण ने सभी का मन मोह लिया। झरने की शीतल जलधारा में सदस्य जी भरकर जलक्रीड़ा का आनन्द लिये।
यूथ हॉस्टल्स दुर्ग भिलाई इकाई के प्रेसिडेंट ऋषि कांत तिवारी ने बताया कि रात्रि विश्राम के लिए अगला पड़ाव माँ चण्डी मन्दिर घुँचापाली बागबाहरा रहा । यहाँ पहुँच कर प्रतिभागी अत्यंत प्रसन्न हुए। रात्रि में घुँचापाली के मनोरम परिदृश्य ने सभी को कल्पनालोक का एहसास कराया। पहाड़ी में स्थित माँ चण्डी मन्दिर परिसर की दूधिया रोशनी में जंगली मादा भालू को खुले में दो शावकों के साथ सहज विचरण करते देखना लोगों के लिए किसी कौतूहल से कम नहीं था।

संस्था के कोषाध्यक्ष हेमलाल देवांगन ने बताया कि अगले दिन सभी सदस्य नहा धोकर माँ चण्डी की महा आरती में शामिल हुए । उसके बाद पुरातात्विक स्थल लक्ष्मण मन्दिर सिरपुर का अवलोकन किये । विदित हो कि सिरपुर छत्तीसगढ़ की प्राचीन राजधानी रही है और उसका तात्कालिक नाम श्रीपुर अर्थात समृद्धि का गढ़ रहा है । महानदी के तट पर स्थित यह स्थल अनेक पुरातात्त्विक मन्दिरों और समृद्ध विरासत के लिए विख्यात है।
संस्था के सचिव सुबोध देवाँगन के अनुसार शाम को सदस्यों ने रायपुर में वीआईपी रोड स्थित भव्य राम मंदिर के दर्शन किये। उसके बाद सांस्कृतिक वैभव की अनुभूति के लिए चोकरधानी रायपुर का अवलोकन किये। यहाँ राजस्थान की लोककला , संस्कृति , खान-पान , परिधान एवं रीति-रिवाज से सभी अत्यंत भाव विभोर हुए। छत्तीसगढ़ में राजस्थान की गौरवशाली परम्परा और जनपदीय लोकजीवन का जीवन्त अनुभव कर प्रतिभागी एक अविस्मरणीय यादें संजोये अपने घर लौटे।

आयोजन को सफल बनाने में संजय साहू, सुलेखा साहू, प्रिया जाँगड़े, श्वेता तिवारी, राजेश मराठे, सुखबीर सिंह ब्रोका, सुरिन्दर कौर ब्रोका, जसबीर सिंह ब्रोका, नवजीत कौर ब्रोका, सरोज अग्रवाल , ओंकार प्रसाद साहू, तारकेश्वरी साहू, उषा रानी यादव, विकास चौधरी, फाल्गुनी चौधरी, श्रुति चटर्जी, परमजीत सिंह, मंजीत कौर, देशबन्धु शर्मा, दिव्या शर्मा , किशोर छबलानी, हरिशरणजीत कौर, अविनाश तिवारी, अक्षत तिवारी, पूर्णिमा चटर्जी, सतानन्द तिवारी, गुरप्रीत सिंह सोइन, के. स्तुति , निखिल त्रिपाठी , काशवी त्रिपाठी , चैतन्य ऋषि , हेमांगी ऋषि , राजश्री श्रृंगार पुतले सहित अन्य लोगों की सराहनीय भूमिका रही।

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