दुर्ग जिला हिन्दी साहित्य समिति ने तुलसी जयंती समारोह पूर्वक मनाया

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रामचरितमानस वेद, पुराण, शास्त्रों का सार है- आचार्य डॉ. महेश चन्द्र शर्मा

दुर्ग, दुर्ग जिला हिन्दी साहित्य समिति, दुर्ग के तत्वावधान में तुलसी जयंती का आयोजन स्थानीय आई एम ए भवन में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि आचार्य डॉ. महेश चन्द्र शर्मा ने कहा रामचरितमानस वेद शास्त्रों का सार है। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से मानस में वर्णित मानवीय जीवन चरित्र की व्याख्या की। समिति अध्यक्ष बलदाऊ राम साहू ने तुलसी की काव्यगत विशेषता का वर्णन करते हुए कहा-“मानस सिर्फ धर्म शास्त्र ही नहीं वरन् शिक्षा शास्त्र, नीति शास्त्र तथा दर्शन शास्त्र और समाज शास्त्र भी है। वास्तव में मानस हमें जीवन जीना सिखाता है। आज परिवार को एक सूत्र बाँधना है तो घर में मानस का पाठ करें।

आमंत्रित वक्ता त्रेता चन्द्राकर ने कहा- तुलसी एक लोक चिंतक संत हैं, उन्होंने मानस को जनमानस तक पहुँचाने के लिए सहज उदाहरण दिये हैं। आगे कहा कि माया के आवरण में जन्मा व्यक्ति ईश्वर का अंश है यह वह भूल जाता है। मानस मर्मज्ञ  लेखनी वर्मा ने दोहे और चौपाइयों के माध्यम से बताया कि तुलसी ने राम-लक्ष्मण के चरित्र को साहित्य के सभी नौ रसों से उकेरा है। तुलसी ने मानस को लोकहित के लिए बनाया है। कैलाश जैन बरमेचा ने रामचरितमानस को संस्कार और संस्कृति की अनमोल कृति बताया। सरला शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज भी बेटी के साथ बिदाई में शुभ संस्कार के प्रतीक स्वरूप मानस प्रति भेजी जाती है। अपने स्वागत भाषण में सचिव राकेश गुप्ता रूसिया ने मानस को मानवीय रिश्तों का आदर्श ग्रंथ बताया।

अतिथियों द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जी के छाया चित्र में माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ ज्येष्ठ नागरिक संघ पोटियाकला के संगीतकारों की भजन प्रस्तुति व यश दलवी के सरस्वती वंदना से हुई। प्रथम बौद्धिक सत्र का मंच संचालन हाजी इसराइल बेग शाद ने तथा आभार प्रदर्शन डाॅ. संजय दानी ने किया, अतिथियों का सम्मान शाल मोमेंटो से किया गया।

काव्य गोष्ठी के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता गुलबीर भाटिया, राज नारायण श्रीवास्तव, शरद कोकास व अरुण निगम ने की तथा मंच संचालन डॉ. विजय गुप्ता मुन्ना ने किया। भाटिया  ने दुर्ग जिला हिन्दी साहित्य समिति के सौवें साल में प्रवेश व इतिहास की जानकारी दी। अनेक नामचीन कवियों में एन एल मौर्य, चन्द्रशेखर शर्मा, सुशील यादव, शुभेंदु बागची, दशरथ सिंह भुवाल, राकेश रूसिया, शाद बिलासपुरी, शमशीर शाहीन, सूर्यकांत गुप्ता, इंद्रजीत दादर निशाचर, घनश्याम सोनी, विद्या गुप्ता, नरेंद्र देवांगन, राज नारायण श्रीवास्तव, शरद कोकास, विजय गुप्ता सहित अनेक कवियों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में बी आर मंडावी, राजेन्द्र वर्मा, अश्विनी साहू, गणेश राम चौधरी, टी पी साहू, नरेंद्र साहू, नवेद रजा दुर्गवी, दिनेश उभरे,आर के तिवारी, के आर देशमुख सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन हनुमान चालीसा के संयुक्त पाठ से हुआ।

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