प्रगतिशील सृजन का ‘आरंभ’ : भिलाई में नई साहित्यिक संस्था का गठन

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‘आरंभ हो, अंत न हो — चिंतन कभी कलांत न हो’

प्रगतिशील एवं जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ का गठन : भिलाई-दुर्ग के 15 साहित्यिक चिंतकों ने एकजुट होकर बनाया, प्रगतिशील सृजन का ‘आरंभ’ : ‘आरंभ’ हो अंत न हो-चिंतन कभी कलांत न हो

भिलाई, बुधवार, भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस के सभागार में लेखक, कवि एवं समाजसेवी एकजुट होकर एक नई साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ का गठन किया। पहली सांगठनिक बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी कैलाश जैन बरमेचा ने की। मोटिवेशनल स्पीच के लिए विशेष रूप से उपस्थित हुए। सुप्रसिद्ध प्रगतिशील कवि रवि श्रीवास्तव एवं सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विनोद साव।

प्रारंभिक संचालन डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने किया। ‘आरंभ’ की परिकल्पना और भूमिका के बारे में प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया।

शायरा नुरूस्साबाह खान ‘सबा’ ने संस्था के उद्देश्य को पढ़ा। कहा कि- हमारी नई साहित्यिक संस्था नव चिंतन का आलंब है ‘ आरंभ । हम मानते हैं साहित्य एक का नहीं, सबका है. जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति लेखक, कवि, शायर हो। यदि आप अच्छे श्रोता हैं या पाठक हैं तो भी आप साहित्य को अपना योगदान दे रहे हैं।

बैठक में पंजीयन की प्रक्रिया होने तक सर्वसम्मति से अंतिरम अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य को बनाया गया। सदन में डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका अनुमोदन डॉ. रजनी नेलसन ने किया ।  मुख्य संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा को बनाया गया।

‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य हैं-
कैलाश जैन बरमेचा, डॉ. महेश चंद्र शर्मा, प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, डॉ. रजनी नेलसन, अनिता करडेकर, नुरूस्साबाह खान ‘सबा’, तारकनाथ चौधुरी, पल्लव चटर्जी, त्रयम्बक राव साटकर ‘अम्बर’, शानू मोहनन, दीप्ति श्रीवास्तव, संध्या श्रीवास्तव, सुबीर रॉय, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल और आलोक कुमार चंदा।

आभार व्यक्त अनिता करडेकर ने किया ।

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