श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को, आधी रात 12 बजे होगा कान्हा का जन्मोत्सव

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अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर रात 12:13 बजे तक रहेगी; निशीथ काल में 11:57 से 12:43 बजे तक पूजा का विशेष मुहूर्त

भिलाई, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस वर्ष 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिरों और घरों में दिनभर व्रत, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। भक्त मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा कर पंचामृत से अभिषेक करेंगे और आरती के बाद प्रसाद वितरित करेंगे।

पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा 4 सितंबर की रात निशीथ काल में की जाएगी। निशीथ पूजा का समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक बताया गया है।

दिनभर व्रत और पूजा की तैयारी

जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करेंगे और भगवान श्रीकृष्ण के नाम से व्रत एवं पूजा का संकल्प लेंगे। घरों और मंदिरों में पूजा स्थल की सफाई कर आकर्षक सजावट की जाएगी। कई स्थानों पर बाल गोपाल के लिए विशेष झांकी, पालना और फूलों से सजावट की जाएगी।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर भगवान कृष्ण की भक्ति में रहकर भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना करेंगे। शाम के समय भगवान के बाल स्वरूप को स्नान कराकर नए वस्त्र और आभूषण पहनाने की तैयारी की जाएगी।

बाल गोपाल का होगा विशेष श्रृंगार

जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को पालने में विराजित कर विशेष श्रृंगार किया जाएगा। बाल गोपाल को सुंदर वस्त्र, आभूषण, मोरपंख और चंदन का तिलक लगाया जाएगा। इसके बाद उन्हें झूले में विराजित कर भक्त श्रद्धा के साथ झूला झुलाएंगे।

मध्यरात्रि में पंचामृत अभिषेक

जन्माष्टमी की मुख्य पूजा मध्यरात्रि में होगी। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के समय दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत तथा गंगाजल से अभिषेक किया जाएगा। अभिषेक के बाद भगवान को स्वच्छ जल से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाएंगे।

इसके बाद भगवान को चंदन, रोली, अक्षत, फूल, तुलसी दल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाएगी। श्रीकृष्ण को बांसुरी अर्पित करने की भी परंपरा है।

माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी का लगेगा भोग

भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री के साथ धनिया पंजीरी, पंचमेवा, खीर और मौसमी फलों का भोग लगाया जाएगा। पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व रहेगा।

भोग के बाद भगवान श्रीकृष्ण की आरती की जाएगी। शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच श्रद्धालु ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बनाएंगे।

जन्मोत्सव के बाद होगा पालना झुलाने का कार्यक्रम

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा के साथ ही मंदिरों में उत्सव का माहौल बनेगा। श्रद्धालु बाल गोपाल को पालने में झुलाएंगे और भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। कई मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण के विशेष आयोजन भी किए जाएंगे।

5 सितंबर की सुबह व्रत पारण

जन्माष्टमी व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन निर्धारित समय और अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करेंगे। व्रत पारण के बाद भगवान श्रीकृष्ण का प्रसाद ग्रहण कर पूजा संपन्न की जाएगी।

जन्माष्टमी का संदेश यही है कि श्रद्धा, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलते हुए जीवन में सत्य और सदाचार को अपनाया जाए। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर शहर के मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं और पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है।

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