41वीं मासिक काव्य संध्या में साहित्य, स्वास्थ्य और देशभक्ति का संगम
रामचंद्र श्रीवास्तव और कश्विता जालान को श्रेष्ठ काव्य पाठ सम्मान
रायपुर, साहित्य सृजन संस्थान द्वारा लगातार जारी 41वीं मासिक काव्य संध्या, पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एवं देशभक्ति गीतों से पूरा हॉल गूंजा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.संजय अलंग पूर्व आईएएस, नरेश कांकरिया उप महाप्रबंधक ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, डॉ. प्रतीक राजपूत तंत्रिका मनोचिकित्सक, डॉ. चंद्र किरण राजपूत एवं राजकुमार शर्मा अध्यक्ष पंजाबी ब्राह्मण समाज विशिष्ठ अतिथि एवं अध्यक्षता वीर अजीत शर्मा ने किया।
इस कार्यक्रम मे काव्य पाठ, स्वास्थ्य बीमा एवं तंत्रिका मनोचिकित्सा संबंधी जानकारी के साथ साथ साहित्य सृजन, श्रेष्ठ काव्य पाठ सम्मान रामचंद्र श्रीवास्तव एवं कश्विता जालान को सम्मानित किया। साहित्य सृजन संस्थान की स्मारिका “साहित्य सृजन 2025” का विमोचन भी किया गया।

काव्य संध्या की कुछ काव्य पाठ की झलकियां :–
एक मेव जयते
भारत राष्ट्र हमारा अन्तर्रअरि के रव रव को शांत करें
रवि किरणों संग अंधकार का संधान करें
अपने अर्जुन का अर्जन कर गीता श्रवण करें
कुरुक्षेत्र से मरु र भूमि तक
अरि र हंत कर जायें
करूणा नीर बहायें
आ अब सब मिल कर अनहद नाद जगायें
एक आत्म से परमआत्म तक एक मेव जयते
अंकुर डॉक्टर चन्द जैन
मंच सजे हैं, भाषण गूंजे
हर चौराहे पर जयघोष है,
देश की उन्नति में
हिस्सेदारी का कहाँ होश है? सवाल सिर्फ़ इतना सा
क्या हमें गणतंत्र चाहिए,
या सिर्फ़ उसका त्योहार?
कश्विता जालान
भारत माता की जय
दे सलामी इस तिरंगे को,
जिससे तेरी शान है,
कदम हमेशा आगे रखना,
यह हमारा हिन्दुस्तान है,
हरेंद्र सिंह ठाकुर
हरी भरी हो वसुंधरा, ये ख्वाब सिर्फ आभासी है
कटते जंगल-सूखती नदिया, माटी अब भी प्यासी है अदिति तिवारी
मेरी देशभक्ति रचना, जो आज पढ़ा हूँ, हिमालय की ये बुलंदियाँ हैं आज तुम्हें पुकारती,
सपूत हो भारत माँ के मेरे चले आओ भारती । उमेश कुमार सोनी ‘नयन’
दल भ्रमर का बूटियों के पास मंडराने लगा,
कोयलों ने गीत गाया
आम बौराने लगा,
बाग का वीरान कोना आज इठलाने लगा,
पहुना बनआज ऋतुराज आने लगा।
विजया पाण्डेय
विश्वास जिनका अटल होता है
जीवन जिनका सरल होता है
वो अगर तन लेंतो बंजर
जमीन में भी जल होता है
नरेश कांकरिया
चाहे पथ में आंधी आए,
या दुख के बादल छा जाएं।
मातृ भूमि की सेवा में तत्पर,
पथ पर अविचल बढ़ते जाएं।
विरेन्द्र शर्मा “अनुज”
गांधी, तिलक, सुभाष , जवाहर
का प्यारा यह देश है ।
अनेकता में एकता का ,
देता यह संदेश है ।
वन्दे मातरम, वन्दे मातरम
रूनाली चक्रवर्ती
एक नन्हीं मुन्नी पुजारन,
पतली बाहें पतली गर्दन,
भोर भई मंदिर आई है,
आई नहीं मां लाई है,
वंदना ठाकुर
भारत माँ के आँचल से अब, तामस दूर भगाना है।
अमर शहीदों की गाथा को, जन-जन तक पहुँचाना है।। ‘सुषमा’ नित वंदन करती है, शूरवीर बलिदानों को।
जिनसे रोशन हुआ वतन है, वंदन वीर जवानों को।।
हर दिल में भारत बसता है, उन्नत राष्ट्र बनाना है।
अमर शहीदों की गाथा को, जन-जन तक पहुँचाना है।। सुषमा प्रेम पटेल
काव्य संध्या में किशोर लालवानी, आराध्या शर्मा, शशिकरण वर्मा, अर्चना श्रीवास्तव, अंजु पाण्डेय, सुरेंद्र रावल, मनोज शुक्ला, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी, रामचंद्र श्रीवास्तव, हाजी रियाज खान गौहर, संजय कुमार पांडे, अनिल बरडिया, देव लाल साहू, मधु बिसोई, अश्विन शर्मा, एस एन जोशी, सरफराज, मंजूषा अग्रवाल, डॉ. मांगी लाल यादव, राकेश उपाध्याय, दिलीप पंजवानी आदि ने उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम का आनंद लिया।



