न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी केवल समानता का प्रश्न नहीं है, बल्कि इससे न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील, संतुलित और सशक्त बनती है: न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के यूनिटी ऑडिटोरियम में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन 10 मार्च मंगलवार को किया गया। न्यायाधीशगण एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन के उपरांत राष्ट्रीय गान के पश्चात पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर न्यायपालिका से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए न्यायमूर्ति रजनी दुबे न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, महिला न्यायिक अधिकारीगण, महिला अधिवक्तागण एवं माननीय उच्च न्यायालय में कार्यरत विभिन्न श्रेणी के महिला कर्मचारियों को उनके उल्लेखनीय योगदान एवं सेवाओं के लिए कुल 54 महिलाओं को सम्मानित किया गया। यह आयोजन न्यायिक व्यवस्था एवं समाज में महिलाओं की सशक्त भूमिका, उनकी उपलब्धियों तथा उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना।

इस गरिमामय अवसर पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने प्रेरणादायक उद्बोधन में प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डालते हुए एक प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में उनकी शक्ति, दृढ़ता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने वर्ष 2026 का थीम ” गिव टू गेन” विषय का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना तथा उन्हें बेंच और बार में समान अवसर प्रदान करना न्यायपालिका, विधि के शासन तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सुदृढ बनाता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी केवल समानता का प्रश्न नहीं है, बल्कि इससे न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील, संतुलित और सशक्त बनती हैं। जब महिलाओं को न्यायपालिका में समान अवसर दिए जाते हैं तथा उनके सशक्तिकरण को प्रोत्साहित किया जाता है, तो इसका लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे समाज और कानून के शासन को सुदृढ बनाता है। “

मुख्य न्यायाधीश ने इस अवसर पर उच्च न्यायालय, जिला न्यायालयों, सिविल न्यायालयों तथा राज्य के अन्य कार्यालयों एवं विभागों में कार्यरत महिलाओं के समर्पण और महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता विधिक क्षेत्र को समृद्ध बनाती है तथा न्याय को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल महिलाओं के सम्मान का अवसर ही नहीं हैं, बल्कि यह समाज में समानता का अवसर, सुरक्षा और समावेशिता सुनिश्चित करने के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दृढ करने का भी अवसर है।

यह उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायमूर्ति के मार्गदर्शन में राज्य के समस्त जिला न्यायालयों में भी अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस – 2026 के अवसर पर जिला न्यायपालिका से संबद्ध विभिन्न श्रेणी के महिला अधिकारी एवं कर्मचारियों को सम्मानित किये जाने हेतु गरिमामय सम्मान समारोह का सफल आयोजन किया गया।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पार्थ प्रतीम साहू, न्यायाधीश रजनी दुबे, न्यायाधीश नरेन्द्र कुमार व्यास, न्यायाधीश नरेश कुमार चंन्द्रवंशी, न्यायाधीश सचिन सिंह राजपूत, न्यायाधीश राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायाधीश राधाकिशन अग्रवाल, न्यायाधीश संजय कुमार जायसवाल, न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायाधीश अरविन्द कुमार वर्मा, न्यायाधीश बिभू दत्ता गुरु एवं न्यायाधीश अमितेन्द्र किशोर प्रसाद, महाधिवक्ता, वरिष्ठ अधिवक्तागण, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी एवं सदस्यगण, अधिवक्तागण, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल रजिस्ट्री के अधिकारीगण, न्यायिक कर्मचारीगण एवं माननीय उच्च न्यायालय में सेवा देने वाले अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारीगण भी उपस्थित रहे।

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